मैथिली भोजपुरी अकादमी
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अकादमी द्वारा किए गए कार्यक्रमों(2008-2013)का विस्तृत विवरण
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अकादमी द्वारा किए गए कार्यक्रमों (2008-2013) का विस्तृत विवरण

 अकादमी ने 5 अगस्त, 2008 को 'बिदेसिया' जो कि प्रख्यात भोजपुरी लोकसर्जक भिखारी ठाकुर की रचना है, का मंचन कराया, जिसका निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया। 6 अगस्त, 2008 को मैथिली नाटक 'पाठक लोक' (निर्देशनः प्रकाश झा) का मंचन हुआ। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सम्पन हुए।

 

अकादमी ने 24 दिसम्बर, 2008 को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (डिम्ड विश्वविद्यालय), दिल्ली में 'पुरबिया मनई आ साहित्य : नयकी चुनौती' शीर्षक संगोष्ठी का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता डॉ० केदार नाथ सिंह ने की, जबकि आतिथ्य श्री केशव चंद्र(अतिरिक्त सचिव,संस्कृति व विशिष्ट सचिव, मुख्यमंत्री, दिल्ली) का रहा। प्रतिभागी थे- श्री जयशंकर गुप्त तथा डॉ० रामाशंकर श्रीवास्तव। इसमें भोजपुरी व मैथिली जनों प्रवासियों के जीवन व साहित्य संस्कृति के विभिन्न प्रसंगों पर गहन चर्चा हुई।

 

अकादमी ने 20 जनवरी, 2009 को गणतंत्र दिवस-उत्सव का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्व आलोचक प्रो० नित्यानंद तिवारी ने की। यह एक नए तरह का आयोजन था, जहॉँ विशाल जन-समूह के सम्मुख देश में पहली बार समकालीन गंभीर कविताएँ पढ़ी गयीं, जिनका न केवल श्रव्य महत्व है, बल्कि पाठ्य भी। ये कविताएँ आस्वाद से आगे हमें ले जाती हैं। मैथिली में कविता पाठ करने वाले कवि थे- श्री रवींद्र नाथ ठाकुर, डॉ० गंगेश गुंजन, श्री रमण कुमार सिंह, श्री रवींद्र लाल दास, श्री सारंग कुमार, डॉ० कामिनी कामायनी तथा भोजपुरी में कविता पाठ करने वाले थे- डॉ० चंद्रदेव यादव, प्रो० शत्रुघ्न कुमार, श्री मनोज भावुक, श्री प्रमोद तिवारी तथा सुश्री अलका सिन्हा। मुख्य अतिथि थीं- दिल्ली सरकार की कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री श्रीमती किरण वालिया।

 

साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार श्री मंत्रेश्वर झा का एकल कविता-पाठ 19 फरवरी, 2008 को किया गया। श्री मंत्रेश्वर झा ने इस अवसर पर कविता-पाठ के अलावा अपनी संरगृतियॉ भी सुनाई। अध्यक्षता डॉ० गंगेश गुंजन की थी।

 

अकादमी ने 15, 16, 17 एवं 18 मार्च, 2009 को लोक संस्कृति प्रसंग का आयोजन किया। इसमें 15 मार्च को भोजपुरी भाषा में धोबियउ व कॅहरउ नाच का आयोजन किया गया। यह अपने तरह का दिल्ली में प्रथम प्रयास था। विशिष्ट अतिथि प्रख्यात नृत्यांगना डॉ० शोभना नारायण थीं। 16 मार्च को थारू जनजाति के नाच का आयोजन किया गया। थारू जनजाति ने प्रथम बार दिल्ली में यह प्रस्तुति दी थी। विशिष्ट अतिथि (कला, संस्कृति, भाषा व शिक्षा सचिव, दिल्ली) श्रीमती रीना रे थीं। 17 मार्च को मैथिली का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जो 'रंगभूमि' की ओर से था। विशिष्ट अतिथि प्रख्यात गायिका श्रीमती सविता देती थीं। 18 मार्च को मैथिली का सांस्कृतिक नृत्य नाटक 'जट जटिन' मंचित हुआ, जिसकी प्रस्तुति स्मृति ट्रस्ट की ओर से हुई। विशिष्ट अतिथि प्रख्यात ध्रुपद गायक श्री अभय नारायण मल्लिक थे।

 

रात्रि समय संजय चौधरी निर्देशित मैथिली नाटक का मंचन हुआ, जिसका शीर्षक था- 'किंकर्तव्यविमूढ़'। यह नाटक हमारे समय की त्रासदी को अन्यतम ढंग से बयॉ करता है। विशिष्ट अतिथि थे- प्रो० देवेन्द्र राज अंकुर।

 

इस द्विदिवसीय संगोष्ठी में साहित्य व संस्कृति पर गहरी चर्चा हुई तथा साहित्य के ऐसे प्रश्न भी चर्चित हुए, जो अन्यथा अनुद्घाटित थे।

 

इस वित वर्ष अकादमी के द्वारा 8 गैर सरकारी संस्थाओं को कार्यक्रम करने में सहयता की गई जिनके द्वारा साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम किये गये।

 

मैथिली-भोजपुरी की 130 पुस्तकों का क्रय इस वित्त वर्ष में किया गया।

 

28 मार्च व 29 मार्च को अकादमी ने अत्यंत विशिष्ट संगोष्ठियॉ आयोजित की। ये संगोष्ठियॉ राष्ट्रीय थीं तथा उनका विषय साहित्य व संस्कृति के महत्वपूर्ण विषयों में नया उन्मेष लाने वाले थे। भोजपुरी की राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय था- 'समकालीन सर्जनात्मकता आ साहित्य' तथा 'समकालीन सर्जनात्मकता आ संस्कृति'। यह संगोष्ठी दो सत्रों में थी। उद्घाटन किया- प्रख्यात आलोचक व सरस्वती सम्मान विजेता श्री षम्सुर्रहमान फार्रूकी ने। अन्य प्रतिभागी थे- श्री गोपेश्वर सिंह, श्री रवीन्द्र श्रीवास्तव, 'जुगानी भाई', डॉ० नागेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ० सिद्धार्थ शिवशंकर, दूसरे सत्र में प्रतिभागी थे- डॉ० तैयब हुसैन पीड़ित, प्रो० वागीष शुक्ल, डॉ० प्रेम प्रकाश पाण्डेय। अध्यक्षता की डॉ० आशा रानी लाल ने। रात्रि में महेंद्र प्रसाद सिंह के निर्देशन में भोजपुरी नाटक कचोट का मंचन हुआ। विशिष्ट अतिथि थे- श्री सुरेंद्र कौल, महानिदेशक, सी०सी०आर०टी०। यह नाटक नागरिक चेतना को जगाता है। दूसरे दिन 29 मार्च, 09 को मैथिली की राष्ट्रीय संगोष्ठी समकालीन रचनाकारक दायित्व : भाषा, साहित्यक संदर्भ में तथा समकालीन रचनाकारक दायित्वसमाज, संस्कृति संदर्भ में विषयों पर दो सत्रों में आयोजित की गयी। सत्रों के प्रतिभागी थे- डॉ० विद्यानाथ विदित, डॉ० शेफालिका वर्मा, डॉ० देव शकर नवीन नवीन, डॉ० नीता झा, श्री कुमार शैलेंद्र, श्री प्रदीप बिहारी, डॉ० मोहन भारद्वाज। डॉ० 'विदित' 'भारद्वाज' ने क्रमशः प्रथम व द्वितीय दो सत्रों की अध्यक्षता की। समकालीनता सिर्फ कालवाची नहीं है तथा रचनाकार का दायित्व मनुष्यता का विस्तार है।

 

30 अगस्त, 2009 को इण्डिया इंटरनेश्नल सेंटर, नई दिल्ली में मैथिली-भोजपुरी भाषा-भाषियन के योगदानविषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात आलोचक प्रो० निर्मला जैन ने की। विशिष्ट अतिथि थे- श्री सजय गुप्त, संपादक, दैनिक जागरण। वक्ता थे- डॉ० शेफालिका वर्मा, श्री वीरेन्द्र कुमार बरनवाल, श्री जयशंकर गुप्त तथा श्री रवींद्र कुमार दास। सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ० गिरीश चंद्र श्रीवास्तव का था।

 

30 सितंबर, 2009 को राजेंद्र भवन, नई दिल्ली में 'गद्य प्रसंग' का आयोजन किया गया, जिसमें गद्य की विभिन्न विधाओं में प्रतिभागियों ने पाठ किया। प्रतिभागी थे- सुश्री कामना झा (मैथिली कहानी), डॉ० सतीश यादव(भोजपुरी संस्मरण), मानवर्द्धन कण्ठ (मैथिली रिपोर्ताज), श्री दिनेश कुमार (भोजपुरी आलोचना-निबंध), विशिष्ट अतिथि थे- कवि, अनुवादक श्री अक्षय कुमार।

 

19 अक्टूबर, 2009 को पूर्वा सांस्कृतिक केन्द्र, लक्ष्मीनगर, दिल्ली में छठ व सांस्कॄतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें छठ व भोजपुरी लोकगीत का गायन प्रख्यात गायिका सुश्री रश्मि अग्रवाल ने किया। मैथिली के कवि विद्यापति व गोविन्द दास के पद पर कविता ठाकुर ने कथक नृत्य की प्रस्तुती की।

 

26 अक्टूबर, 09 को त्रिवेणी सभागार में कव्वाली का आयोजन किया गया, जिसमें निराला की भोजपुरी कविता और कबीर, अज्ञेय, धर्मवीर भारती, हरिवंशराय बच्चन, राजकमल चौधरी, अमीर खुसरो, गालिब आदि की रचनाओं पर आधारित थी। हिन्दी और मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली ने अपनी तरह के अनुठे और संभवत: विश्व में पहली बार हुए इस प्रयोग में इन महत्वपूर्ण कवियों की रचनाओं को कव्वाली के रूप में प्रस्तुत किया। दिल्ली के प्रसिद्ध कव्वाल अब्दुर्रहमान ने भिन्न-भिन्न रचनाओं को कव्वाली के रूप में प्रस्तुत किया।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी एवं हिन्दी अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य से संबंध रखने वाली, लेकिन धीरे-धीरे गायब हो रही विभिन्न प्रदर्शनकारी कलाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से 26 अक्टूबर, 2009 को हाथरस शैली की नौटंकी का मंचन त्रिवेणी सभागार में किया। शिकोहाबाद उत्तर-प्रदेश से आई श्रीमती कृष्णा माथुर और उनके साथियों ने इंदल हरण नौटंकी की प्रस्तुति दी। परिचय दास जो स्वयं गायक, कवि- आलोचक हैं, उन्होंने कार्यक्रम के आरम्भ में दोहा व बहर-ए-तबील में गायन करके कार्यक्रम को संगीतिक गति प्रदान की।

 

मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा ‘‘समकालीन कला-संगोष्ठी’’ का आयोजन 29 नवम्बर, 2009 को राजेन्द्र भवन दिल्ली में किया गया। जिसमें सुविख्यात वक्ता श्री विनोद भारद्वाज, मिथीलेश श्रीवास्तव, विनय कुमार एवम् राष्ट्रीय सहारा के कला संपादक श्री रवीन्द्र कुमार दास थे।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा ‘’सांस्कृतिक कार्यक्रम’’ का आयोजन 9 जनवरी, 2010 को रोहिणी, दिल्ली में किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में सुश्री अंजु झा एवम् बबलू सिंह का गायन एवम् नर्तन हुआ।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा गणतंत्र-दिवस कविता उत्सव का आयोजन 24 जनवरी, 2010 को आई०सी०सी०आर० सभागार में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती किरण वालिया ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और वरिष्ठ कवि प्रो० केदारनाथ सिंह जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मैथिली व भोजपुरी भाषा बोलने वाले लोगों की स्मृति व इच्छा की रक्षा करने के लिए कविता उत्सव प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस पर किया जाता है। इस अवसर पर मैथिली में शेफालिका वर्मा, गंगेश गुंजन, सुष्मिता पाठक, तारानंद वियोगी, रमण कुमार सिंह, कामिनी कामायनी, रवीन्द्रलाल दास, पंकज पराशर, सारंग कुमार, मंजर सुलेमान और भोजपुरी में जुगानी, हरिराम द्विवेदी, चंद्रदेव यादव, कुबेर नाथ मिश्र विचित्र’, शत्रुघ्न कुमार, राधेश्याम तिवारी, महेन्द्र सिंह, प्रमोद तिवारी, अलका सिन्हा, प्रकाश उदय, मनोज भावुक, कमलेश राय कविता पाठ हेतु आमंत्रित थे। श्रोता से खचाखच भरे हॉल में देर रात तक कविता उत्सव चलता रहा।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा भोजपुरी नाटक लुटकी बाबा के रामलीला का मंचन भाई वीर सिंह मार्ग पर स्थित बांग्ला सांस्कृतिक केन्द्र में 06 मार्च, 2010 को किया गया। भोजपुरी नाटक लुटकी बाबा के रामलीला के लेखक व निर्देशक श्री महेन्द्र प्रताप सिंह थे। इस नाटक की प्रस्तुति रंगश्री संस्था द्वारा किया गया। यह नाटक भोजपुरी भाषा की अश्लीलता को चंगुल से निकालने के लिए एक गांव के प्रयास को दिखा रहा था। इस नाटक के चुटीले संवाद को बेहद पसंद किया गया।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा मैथिली नाटक टुस्सा आ बाझी का मंचन भाई वीर सिंह मार्ग पर स्थित बांग्ला सांस्कृतिक केन्द्र में 07 मार्च, 2010 को किया गया। मैथिली नाटक टुस्सा आ बाझी के लेखक श्री प्रभास कुमार चौधरी हैं एवं निर्देशक श्री संजय चौधरी थे। इस नाटक की प्रस्तुति मिथिलांगन संस्था द्वारा किया गया। इस नाटक के द्वारा गांव के पंचायत में गरीब के हक के लिए संघर्ष का संदेश दिया गया। इस नाटक के चुटीले संवाद को बेहद पसंद किया गया।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली ने 28 मार्च, 2010 को मैथिली-भोजपुरी गायन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का एक विशाल कार्यक्रम हंस ध्वनी थियेटर, प्रगति मैदान, दिल्ली में किया। शाम के 6.30 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, प्रसिद्ध अभिनेता एवं एंकर शेखर सुमन थे। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि भाषा अपनी जड़ होती है और उसे कभी कमजोर नहीं होने देना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने कुछ मैथिली और कुछ हिन्दी गीत सुनाये। कार्यक्रम के प्रारंभ में अकादमी के सचिव प्रो० रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव परिचय दास ने कहा कि मैथिली-भोजपुरी अकादमी सूरुचिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मैथिली-भोजपुरी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आये भोंड़ेपन और अश्लीलता के आरोप को खत्म कर देना चाहती है। उन्होंने विशाल जनसमूह को धन्यवाद दिया और कहा कि आप सभी कि उपस्‍थिति से हमें ताकत मिली। भविष्य में भी इस तरह का कार्यक्रम करेंगे। सुप्रसिद्ध गायिका पद्ममश्री श्रीमती शारदा सिन्हा ने कार्यक्रम की शुरूआत विद्यापति के रचनाओं से की। श्रोताओं की मांग पर भी अनेकों गीत प्रस्तुत किए। अंत में श्रीमती मालिनी अवस्थी ने अपने साथी कलाकारों के साथ मिलकर गायन एवं नृत्य से श्रोताओं का भरपुर मनोरंजन किया। उन्होंने मॉं ज्वाला देवी की स्तुति गीत के बाद सोहर, बन्ना-बन्नी गीत, धोबिया गीत, चैता एवं होली गीत प्रस्तुत किये।

 

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा आयोजित रंगपूर्वी राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के उद्घाटन दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री एवं अकादमी की अध्यक्ष श्रीमती शीला दीक्षित ने किया। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री के साथ प्रसिद्ध अभिनेता श्री शेखर सुमन भी उपस्थित थे। इस अवसर पर मैथिली-भोजपुरी अकादमी की त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका परिछन के प्रथम अंक एवं प्रदर्शनी के कैटलॉग रंगपूर्वी का विमोचन किया। ललितकला अकादमी के रवीन्द्र भवन में आयोजित यह चित्रकला प्रदर्शनी 29 मार्च से 4 अप्रैल, 2010 तक हुई। इस प्रदर्शनी में 43 कलाकारों के चित्र, मूर्ति, इंस्टालेशन, फोटोग्राफ्स आदि प्रदर्शित किये गये।   

मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिनांक: 24 जनवरी, 2011 को कविता-उत्सव का आयोजन आई०सी०सी०आर० सभागार, आजाद भवन, आई०पी० एस्टेट (आई०टी०ओ०) नयी दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दिल्ली की भाषा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ० किरण वालिया ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए देशवासियों से गणतंत्र को जिंदा रखने की अपील की।

मैथिली-भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ० गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव ने मैथिली-भोजपुरी भाषा के सांस्कृतिक योगदान पर बल देते हुए गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

     मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सचिव प्रो० रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव 'परिचय दास' ने कहा संग्राम के समय कवियों की कविताएं ही थी जिन्होंने देश को एक सूत्र में बांधा। कविता का गणतंत्र स्वाधीनता की लय है। कविता में ठहरकर हम समाज व स्वयं को निहारते हैं।

     अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मैथिली-हिन्दी की जानी-मानी कवयित्री  श्रीमती शांति सुमन ने कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर इस प्रकार के कविता-उत्सव कार्यक्रम देशवासियों में राष्ट्रीय भावना पैदा करते हैं। उन्होंने कवि और कविता के महत्व को भी रेखांकित किया।

कविता-उत्सव का संचालन वरिष्ठ कवि श्री रवीन्द्र श्रीवास्तव 'जुगानी' ने किया।    

इस अवसर पर जहां मैथिली भाषा के इस अवसर पर कामिनी कामायनी, कुमार शैलेन्द्र, कुमार मनोज कश्यप, गंगेश गुंजन, राम लोचन ठाकुर, रवीन्द्र लाल दास, शेफालिका वर्मा और सुकांत वर्मा ने काव्य पाठ वहीं भोजपुरी भाषा मधुर नजमी, अमरेश कुमार, कमलेश राय, तारकेश्वर मिश्र राही, नुरुल बशर उस्मानी, मनोज भावुक, रमाशंकर श्रीवास्तव, रामप्रकाश शुक्ल निर्मोही, रवीन्द्र श्रीवास्तव जुगानी और हरिराम द्विवेदी ने अपना काव्य पाठ में समाज के नव-निर्माण में योगदान देने के लिए अपनी प्रेरणादायी रचनाओं से काव्य-प्रेमियों का आह्वान किया। खचाखच भरे सभागार में श्रोताओं ने कविता-उत्सव के आयोजन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। श्री अजीत दुबे ने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। कार्यक्रम के अंत में मैथिली-भोजपुरी अकादमी, के सचिव प्रो०रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव 'परिचय दास' ने काव्य-‍रसिकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम संपन्न किया।

साहित्य कियैक लिखल जाव ?
12-03-2011 को राजेंद्र भवन, दिल्ली में महिला विमर्श के रूप में राष्ट्रीय मैथिली संगोष्ठी 'साहित्य कियैक लिखल जाव ?' आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता डॉ० शेफालिका वर्मा ने की। इसमें देश भर से 8 मैथिली लेखिकाऍं आमंत्रित की गयी थीं। सदस्यों में रवींद्र दास उपस्थित थे। सान्निध्य डॉ० गिरीश चंद्र श्रीवास्तव का था।

 

सा‍हित्य काहें लिखल जाव ?
13-03-2011 को राजेंद्र भवन, दिल्ली में महिला विमर्श के रूप में राष्ट्रीय भोजपुरी संगोष्ठी 'सा‍हित्य काहें लिखल जाव ?' आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता डॉ० अनामिका ने की। इसमें भी देश भर से 8 लेखिकाऍं आमंत्रित की गई थीं।

विसरत रास रंग
18-03-2011 को प्रख्यात नृत्यांगना डॉ० शोभना नारायण का नृत्य कार्यक्रम त्रिवेणी सभागार, नई दिल्ली में विसरत रास रंग के रूप में रखा गया। इसमें विशिष्ट अतिथि कला, संस्कृति, भाषा विभाग, दिल्ली शासन की प्रधान सचिव, श्रीमती रीना रे। उन्होंने इसे एक श्रेष्ठ प्रयास बताते हुए अपना अविस्मरणीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि विलुप्त होती कलाओं को बचाना आवश्यक है। उपाध्यक्ष, मैथिली-भोजपुरी अकादमी डॉ० गिरीश चंद्र श्रीवास्तव व उपाध्यक्ष, हिन्दी अकादमी डॉ० अशोक चक्रधर का सान्निध्य था। तीन सौ लोग थे।

सोनमछरिया (मैथिली नाटक)
एल०टी०जी० सभागार, मण्डी हाउस, दिल्ली में 21-03-2011 को मैथिली कहानी, सोनमछरिया (लेखक- विकास झा) का नाट्य रुपांतर (रुपांतकार : प्रकाश कांत) प्रस्तुत किया। नाट्य निर्देशन संजय चौधरी का था। विशिष्ट अतिथि कला, संस्कृति, भाषा, दिल्ली शासन के संयुक्त सचिव श्री संजीव पाण्डेय थे। इसी दिन 'परिछन' पत्रिका के दूसरे अंक का विमोचन भी हुआ। 500 लोग एपस्थित थे। सान्निध्य गिरीश चंद्र श्रीवास्तव का था।

मेहारारुन के दुर्दशा (भोजपुरी नाटक)
बंग भवन, भाई वीर सिंह मार्ग, नई दिल्ली की 'मुक्तधारा'  नाट्यशाला में 22-03-2011 को भोजपुरी नाटक, मेहारारुन के दुर्दशा (लेखक : प्रख्यात साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन) प्रस्तुत किया गया। इसके नाट्य निर्देशक महेंद्र सिंह थे। सान्निध्य डॉ० गिरीश चंद्र श्रीवास्तव का था तथा विशिष्ट अतिथि अजीत दुबे थे। लगभग ढाई सौ लोग उपस्थित थे।

विराट् सांस्कृतिक कार्यक्रम
26-03-2011 को विराट् सांस्कृतिक कार्यक्रम, तीन बड़े गायकों का गायन फीरोज शाह कोटला किला, आई०टी०ओ०, नई दिल्ली के सुरम्य वातावरण  में प्रस्तुत किया गया। गायक थे- मालिनी अवस्थी, भरत शर्मा व्यास, शब्बीर कुमार। इन्होंने भोजपुरी व मैथिली गायन किया। शब्बीर कुमार ने भोजपुरी के साथ अपने गाए फिल्मों के हिन्दी गीत भी प्रस्तुत किए। लगभग ढाई हजार की संख्या थी। विशिष्ट अतिथि के रूप में भाषा मंत्री डॉ० किरण वालिया थी। सदस्यों में अजीत दुबे तथा गोस्वामी एस०के०पुरी तथा श्री रवींद्र दास मैजूद थे। सान्निध्य डॉ० गिरीश चंद्र श्रीवास्तव का था।


बिदेसिया (15 अक्टूबर, 2011)          

भोजपुरी नाटक का आयोजन सुरताल ग्राउण्ड, तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में किया गया। भिखारी ठाकुर के नाटक बिदेसिया का मंचन निर्माण कला मंच, पटना के कलाकारों ने श्री संजय उपाध्याय के निर्दे में किया।

छुतहा घैल (16 अक्टूबर, 2011)

मैथिली नाटक का आयोजन सुरताल ग्राउण्ड, तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में किया गया। श्री महेन्द्र मलंगिया के नाटक छुतहा घैल का मंचन मिथिलांगन, दिल्ली के कलाकारों ने श्री संजय चौधरी के निेर्दे में किया।

काव्य पाठ (26 नवम्बर, 2011)

काव्य पाठ का आयोजन त्रिवेणी कला संगम, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। जिसमें मैथिली के सुप्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती सुधा कर्ण ने मैथिली भाषा में एकल काव्य पाठ किया तथा भोजपुरी के सुप्रसिद्ध कवि परिचय दास ने भोजपुरी भाषा में एकल काव्य पाठ किया।

कथा पाठ (27 नवम्बर, 2011)

कथा पाठ का आयोजन त्रिवेणी कला संगम,, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। जिसमें श्री सुरे कांटक ने भोजपुरी भाषा में कहानी पाठ किया और डॉ0 शेफालिका वर्मा ने मैथिली भाषा में कहानी पाठ किया।

संगोष्ठी : भाषा समकाल (28 नवम्बर, 2011)

संगोष्ठी : भाषा समकाल का आयोजन त्रिवेणी कला संगम, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री सुभाष चन्द्र यादव ने की। वक्ता के रूप में श्री अरविन्द कुमार मिश्र एवं श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह पधारे।

संगोष्ठी : साहित्य समाज (29 नवम्बर, 2011)

संगोष्ठी : साहित्य समाज का आयोजन त्रिवेणी कला संगम, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो0 तुलसी राम ने की। वक्ता के रूप में श्री शारदानन्द परिमल एवं श्री जितेन्द्र वर्मा पधारे।

व्याखयान/भेंट : भारत के सांस्कृतिक पुनर्रचना (30 नवम्बर, 2011)

व्याखयान/भेंट : भारत के सांस्कृतिक पुनर्रचना का आयोजन त्रिवेणी कला संगम, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम में श्री भगवान सिंह ने 'भारत के सांस्कृतिक पुनर्रचना' विषय पर अपना सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम (9 दिसम्बर, 2011)

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन राजेन्द्र नगर, दिल्ली में किया गया। जिसमें भोजपुरी की सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती मालनी अवस्थी ने अपनी प्रस्तुति की।

गणतंत्र दिवस कविता उत्सव (15 जनवरी, 2012)

गणतंत्र दिवस कविता उत्सव का आयोजन श्रीराम भारतीय कला केन्द्र, कॉपरनिक्स मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम में मुखय अतिथि के रूप प्रो0 किरण वालिया, माननीय भाषा, समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री, दिल्ली सरकार पधारीं। सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव का प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष् साहित्यकार श्री विवेकानन्द ने की। संचालन सुप्रसिद्ध कवि श्री रवीन्द्र जुगानी ने किया। इस अवसर पर श्री अनिल ओझा 'नीरद', श्री अविनाश, श्री कमलेश राय, श्री तारकेशवर मिश्र राही, श्री मनोज भावुक, श्री रचना योगेश, श्री रमाशंकर श्रीवास्तव, श्री सूर्यनाथ सिंह, श्री ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह, श्री अग्निपुष्प , श्री कुमार मनीष अरविन्द, श्री कुमार राधा रमण, श्री मानवर्धन कण्ठ, श्री रवीन्द्र लाल दास, श्री राम लोचन ठाकुर, श्री विनीत उप्पल, डॉ0 शेफालिका वर्मा ने भोजपुरी एवं मैथिली भाषा में काव्य पाठ कर सभी का मन मोह लिया।

7 सितम्बर, 2012 राग रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम: मैथिली-भोजपुरी अकादमी,  दिल्ली ने दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित ’राग-रंग’ समारोह के अवसर  पर ’सांस्कृतिक कार्यक्रम’ का आयोजन उत्सव पार्क, आई.पी.एक्सटेंशन, पूर्वी दिल्ली में किया गया। जिसमें मैथिली की सुप्रसिद्ध गायिका डॉ0 शारदा सिन्हा एवं भोजपुरी की सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती  मालिनी अवस्थी ने अपने गीतों की प्रस्तुति की।
दिल्ली सेलिब्रेट: लोक-उत्सव (12-13 अक्टूबर,12)

12 अक्टूबर, 2012 बिरजू का बिआह (भोजपुरी हास्य नाटक): दिल्ली सेलिब्रेट  के  अवसर पर मैथिली-भोजपुरी अकादमी,  दिल्ली द्वारा भोजपुरी हास्य नाटक ’बिरजू का बिआह’ का आयोजन सुरताल ग्राउण्ड, तालकटोरा  स्टेडियम, नई दिल्ली में किया गया।  मुख्य अतिथि प्रो0 किरण वालिया, भाषा, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री, दिल्ली सरकार पधारीं। सान्निध्य डॉ0 गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, मैथिली-भोजपुरी  अकादमी का प्राप्त हुआ। नाटक की रचना व निर्देशन श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह ने की।  नाटक का मंच रंगश्री, दिल्ली के कलाकारों  द्वारा किया गया।

13 अक्टूबर, 2012 ओरिजनल काम (मैथिली हास्य नाटक): दिल्ली सेलिब्रेट के अवसर  पर मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा  मैथिली हास्य नाटक ’ओरिजनल काम’ का आयोजन सुरताल ग्राउण्ड, तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में किया गया। सान्निध्य डॉ0 गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष,  मैथिली-भोजपुरी अकादमी का प्राप्त हुआ। श्री  महेन्द्र मलंगिया के नाटक ओरिजनल काम का मंचन मैलोरंग, दिल्ली के कलाकारों ने श्री प्रकाश झा के निर्देशन में किया

चार दिवसीय संगोष्ठी (3-6 नवम्बर,12)
3 नवम्बर, 2012 मैथिली साहित्य और बाबा यात्री (नागार्जुन): संगोष्ठी का आयोजन कोस्तुभ सभागार, ललित कला अकादमी, दिल्ली में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री महेन्द्र मलंगिया ने की।  वक्ता के रूप में डॉ0 देवशंकर नवीन एवं  श्री  पधारे। कार्यक्रम का संचालन श्री रमन  कुमार सिंह ने किया।
4 नवम्बर, 2012 भोजपुरी साहित्य और रघुवीर नारायण: संगोष्ठी का आयोजन कोस्तुभ सभागार, ललित कला अकादमी, दिल्ली में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री प्रताप नारायण ने की। वक्ता  के रूप में डॉ0 रामनारायण तिवारी एवं डॉ0 प्रमोद तिवारी पधारे। कार्यक्रम का संचालन श्री ओंकारेश्वर  पाण्डेय ने किया।
5 नवम्बर, 2012 मैथिली कहानी एवं कविता पाठ: का आयोजन कोस्तुभ सभागार, ललित कला अकादमी, दिल्ली में किया गया। जिसमें कहानी का पाठ श्री श्रीधरम ने किया एवं कविता पाठ  श्रीमती विभा रानी ने किया।
6 नवम्बर, 2012 भोजपुरी कहानी एवं कविता पाठ: का आयोजन कोस्तुभ सभागार, ललित कला अकादमी, दिल्ली में किया गया। जिसमे कहानी पाठ डॉ0 आशा रानी लाल ने किया एवं कविता पाठ डॉ0 अशोक द्विवेदी ने किया।
17 दिसम्बर, 2012 सांस्कृतिक कार्यक्रम: का आयोजन नारायण, दिल्ली में किया गया। जिसमें श्री गजाधर ठाकुर एवं साथियों द्वारा गीत एवं  नृत्य की प्रस्तुति की गई। मुख्य अतिथि माननीय उद्योग एवं परिवहन मंत्री, दिल्ली सरकार उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि सांसद श्री महाबल  मिश्र पधारे। साथ ही स्थानीय विधायक भी उपस्थित थे।
18 दिसम्बर, 2012 सांस्कृतिक कार्यक्रम: का आयोजन लोहा मण्डी, नारायण, दिल्ली में किया  गया। जिसमें श्री गुड्डू रंगीला एवं साथियों द्वारा गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति की  गई। मुख्य अतिथि माननीय उद्योग एवं परिवहन मंत्री, दिल्ली सरकार उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि सांसद श्री महाबल  मिश्र पधारे। साथ ही स्थानीय विधायक भी उपस्थित थे।
19 दिसम्बर, 2012 सांस्कृतिक कार्यक्रम: का आयोजन मंगोल पुरी दिल्ली में किया गया। जिसमें श्री  अजय अल्बेला तथा सुश्री बिजली रानी एवं उनके साथियों द्वारा गीत एवं नृत्य की  प्रस्तुति की गई।
दिल्ली सेलिब्रेट: गणतंत्र दिवस कविता-उत्सव
13 जनवरी, 2013 गणतंत्र दिवस कविता-उत्सव: का आयोजन गणतंत्र दिवस के अवसर पर मैथिली-भोजपुरी अकादमी,  दिल्ली द्वारा ’गणतत्र दिवस कविता उत्सव’ का आयोजन श्रीराम भारतीय कला केन्द्र, मण्डी हाउस, नई दिल्ली में  किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप दिल्ली भाषा, शिक्षा, समाज कल्याण,  महिला एवं बाल विकास मंत्री, प्रो0 किरण वालिया  पधारीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मैथिली-हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री  कीर्तिनारायण मिश्र ने की। संचालन भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गीतकार श्री रवीन्द्रनाथ  श्रीवास्तव ’जुगानी’ ने किया। कविता उत्सव में भोजपुरी के डॉ0 अनामिका, श्रीमती अलका  सिंहा, श्री कमलेश राय, श्री गोरख प्रसाद ’मस्ताना’ श्री चन्द्रदेव यादव,  श्री तारकेश्वर मिश्र ’राही’ श्री मधुर नज्मी,  डॉ0 रमाशंकर श्रीवास्तव, डॉ0 शत्रुध्न कुमार श्री हरिराम द्विवेदी एवं मैथिली के श्री  कुमार मनीष अरविन्द, श्री कुमार राधा रमण,  श्री गंगेश गुंजन, श्री मंजन सुलेमान, श्री रवीन्द्र लाल दास, श्री रामलोचन  ठाकुर, डॉ0 शेफालिका वर्मा कवियों ने काव्य पाठ कर सभी को भार विभोर  कर दिया।
2 फरवरी, 2013 नारी आ अस्तित्व-एकटा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (महिला मैथिली  संगोष्ठी): अकादमी द्वारा महिलाओं  की समाज में उपयोगिता को केन्द्र रखते हुए ’नारी आ अस्तित्व-एकटा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण’ संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मैथिली की महिला  साहित्यकारों को आमंत्रित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मैथिली की सुप्रसिद्ध  साहित्यकार डॉ0 शेफालिका वर्मा ने की।  सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 गिरीशचन्द्र  श्रीवास्तव का प्राप्त हुआ। संचालन सुश्री विनिता मल्लिक ने किया। मुख्य वक्ता के  रूप में श्रीमती संजू दास, श्रीमती नूतन दास,  श्रीमती भावना नवीन, श्रीमती ललिता झा, श्रीमती सरिता दास एवं श्रीमती स्तुति नारायण ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत कर  समाज में फैली विसंगिताओं को इंगित किया।
3 फरवरी, 2013 नारी आ अस्तित्व-एगो मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (महिला भोजपुरी  संगोष्ठी): अकादमी द्वारा महिलाओं  की समाज में उपयोगिता को केन्द्र रखते हुए ’नारी आ अस्तित्व-एगो मनोवैज्ञानिक विश्लेषण’ संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मैथिली की महिला  साहित्यकारों को आमंत्रित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी की सुप्रसिद्ध  साहित्यकार डॉ0 अल्पना मिश्रा ने की।  सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 गिरीशचन्द्र  श्रीवास्तव का प्राप्त हुआ। संचालन श्रीमती सांत्वना द्विवेदी ने किया। मुख्य  वक्ता के रूप में डॉ0 सुनीता, सुश्री सोनल सिंह, डॉ0 सविता सिंह, डॉ0 विभावरी,  डॉ0 विभा सिंह चैहान एवं श्रीमती अल्का सिंह ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत कर समाज  में फैली विसंगिताओं को इंगित किया।
4-10 फरवरी, 2013 पुस्तक प्रदर्शनी: मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली ने पहली बार ’विश्व पुस्तक मेले’ में अपने प्रकाशनों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जिसमें अकादमी ने अपने  प्रकाशनों के साथ अन्य गतिविधियों के बारे में भी लोगों को बताया।

17 मार्च, 2013 विराट सांस्कृतिक कार्यक्रम: मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा ’विराट सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन फिरोजशाह कोटला किला मैदान में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीमती शीला दीक्षित, माननीय मुख्यमंत्री, दिल्ली एवं अध्यक्ष मैथिली-भोजुपरी अकादमी, दिल्ली ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो0 किरण वालिया, माननीय भाषा, शिक्षा, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री पधारी। सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव का प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में भोजपुरी के सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री रविकिशन एवं मैथिली के सुप्रसिद्ध गायक श्री मुरलीधर तथा श्री अमिताभ ने अपनी प्रस्तुति से सभी का मनमोह लिया।

18 मार्च, 2013 चित्रकला प्रदर्शनी: मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा पूर्वांचल के कलाकारों, मूर्तिकारों , शिल्पकारों के चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी में किया गया। जिसमें 45 कलाकारों ने भाग लिया। ’चित्रकला प्रदर्शनी’ का उद्घाटन माननीय प्रो0 किरण वालिया, भाषा, शिक्षा, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री द्वारा किया गया। सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव का प्राप्त हुआ। वक्ता के रूप में श्री रवीन्द्र त्रिपाठी एवं श्री रवीन्द्र कुमार दास पधारे।

24 मार्च, 2013 सांस्कृतिक कार्यक्रम: मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा सफदरजंग एन्क्लेव में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भोजपुरी की सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।

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18 ,oa 19   

vDVwcj] 2014 yksd mRlo fnYyh ljdkj dh *fnYyh lsfyczsV ;kstuk* ds rgr eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh }kjk *yksd mRlo* dk;Zdze dk vk;kstu nknk nso xzkm.M] ¼jkeyhyk eSnku½] ikye ¼fudV }kjdk½ ubZ fnYyh esa fd;k x;kA  ftlesa fnukad 18 vDVwcj] 2014 dks eS0 fuekZ.k dyk eap] iVuk ds dykdkjksa }kjk Hkkstiqjh ukVd *fcnsfl;k* ,oa 19 vDVwcj] 2014 dks eS0 ckjgeklk] fnYyh ds dykdkjksa }kjk eSfFkyh ukVd *nsg ij dksBh [klk fnv* dk eapu fd;k x;kA dk;Zdze esa lkfUu/; vdkneh ds mik/;{k Jh vthr nqcs dk izkIr gqvkA bl volj ij {ks=h; fo/kk;d ,oa fuxe ik’kZn Hkh mifLFkr FksA

15 ,oa 16

uoEcj] 2014 lkaLd`frd dk;ZØe % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh VwfjTe ds la;qDr rRoko/kku esa *lkaLd`frd dk;ZØe* dk vk;kstu fnYyh gkWV] ihre iqjk ubZ fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa Hkkstiqjh dh lqizfl) xkf;dk Jherh Jko.kh Hkwifr ,oa eSfFkyh dh lqizfl) xkf;dk Jherh vatq >k }kjk lkaLd`frd dk;Zdze izLrqr fd;k x;kA

22 ls 24

fnlEcj] 2014 lkaLd`frd mRlo *iwjc dh vksj* fnYyh ljdkj dh *fnYyh lsfyczsV ;kstuk* ds rgr eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh }kjk *lkaLd`frd mRlo % iwjc dh vksj* dk;Zdze dk vk;kstu dekuh lHkkxkj] dkWijfuDl ekxZ] e.Mh gkml] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA  dk;ZØe dk mn~?kkVu Jherh xhrktafy xqIrk] lfpo] dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk foHkkx] fnYyh ljdkj us fd;kA fof”k’V vfrfFk ds :i esa Jh ohjsUnz flag jkor] fo”ks’k lfpo] dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk foHkkx] MkW0 vfuy feJ] iwoZ mik/;{k] eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] ,oa MkW0 fxjh”kpUnz JhokLro] iwoZ mik/;{k] eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh i/kkjsaA lkfUu/; vdkneh ds mik/;{k Jh vthr nqcs dk izkIr gqvkA

lkaLd`frd mRlo esa fnukad 22-12-2014 dks fefFkykaxu ds dykdkjksa us Jh lat; pkS/kjh ds funsZ”ku esa fo|kifr ij dsfUnzr *ufg ykxbZ nqTtu gklk* ukVd dk eapu fd;kA fnukad 23-12-2014 dks lkaLd`frd laxe ds dykdkjksa us Jh okbZ-“kadjewfrZ ds funsZ”ku esa *es?knwr dh iwokZapy ;k=k* laxhre; u`R; ukfVdk dh izLrqfr dh rFkk fnukad 24-12-2014 dks *yksd lkaLd`frd >yd* ds vUrxZr lqizfl) u`R;kaxuk lqJh ufyuh&defyuh us fo|kifr ,oa fHk[kkjh Bkdqj ds xhrksa ij u`R; izLrqr fd;k ,oa Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh nhid f=ikBh us vius xhrksa ls lHkh dk eueksg fy;kA

27 ,oa 28

fnlEcj] 2014 lkaLd`frd dk;ZØe % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh VwfjTe ds la;qDr rRoko/kku esa *lkaLd`frd dk;ZØe* dk vk;kstu fnYyh gkWV] tudiqjh ubZ fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa fnukad 27 fnlEcj] 2014 dks eSfFkyh dh lqizfl) xkf;dk Jherh [kw”kcw frokjh ,oa vks-Mh-lh- ds dykdkjksa us rFkk fnukad 28 fnlEcj] 2014 dks Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh lqthr vks>k ,oa lqizfl) xk;d Jh vfHkrkHk fj;w }kjk lkaLd`frd dk;Zdze izLrqr fd;k x;kA

11 tuojh] 2015    x.kra= fnol dfo lEesyu % fnYyh ljdkj dh *fnYyh lsfyczsV ;kstuk* ds rgr eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk x.kra= fnol ds volj ij dfo lEesyu dk vk;kstu fQDdh lHkkxkj] e.Mh gkml] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA dk;ZØe dk mn~?kkVu Jherh xhrktafy xqIrk] lfpo] dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk foHkkx] fnYyh ljdkj us fd;kA fof”k’V vfrfFk ds :i esa Jh ohjsUnz flag jkor] fo”ks’k lfpo] dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk foHkkx] i/kkjsaA v/;{krk Jh jkeykspu Bkdqj us dhA lkfUu/; Jh vthr nqcs] mik/;{k] eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh dk izkIr gqvkA dfo lEesyu dk lapkyu Jh fouez “kqDy *fouez* us fd;kA ftelsa Hkkstiqjh ds dfo % Hkkstiqjh ds dfo deys”k jk;] dqcsj ukFk feJ *fofp=* xq#pj.k flag] tkSgj “kfQ;koknh] rkjds”oj feJ *jkgh*] nsodkar ik.Ms;] jkts”k dqekj ek>h] of”k’B f}osnh] larks’k iVsy] lqHknzk ohjsu rFkk eSfFkyh ds dfo % mes”k e.My] xaxs”k xqatu] fuosfnrk >k] cqf)ukFk feJ] e`nqyk iz/kku] johUnz yky nkl] fot; ukFk >k] fofurk efyd] “ksQkfydk oekZ us dkO; ikB fd;kA

21 Qjojh] 2015    ubZ fnYyh % eSfFkyh Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *vUrjkZ’Vªh; ekr`Hkk’kk fnol* ds volj ij *lks”ky ehfM;k % eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu bafM;k baVjus”kuy lsUVy] yks/kh jksM] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA laxks’Bh dh v/;{krk ofj’B Vhoh i=dkj Jh jkgqy nso us dhA eq[; vfrfFk ds :i esa ofj’B i=dkj ,oa iwoZ laiknd tulRrk Jh jkecgknqj jk; i/kkjasA lkfUu/; vdkneh ds mik/;{k Jh vthr nqcs dk izkIr gqvkA oDrk ds :i esa fofHkUu lekpkj i=ksa ls tqM+s i=dkj ,oa dkWyst izk/;kid Jh vkyksd dqekj] Jh latho flUgk] Jh f”kokuUn f}osnh *lgj* Jh ijesUnz dqekj feJ] Jh fou; dqekj] Jh mRiy dqekj mifLFkr gq,A

laLFkkxr lg;ksx ;kstuk %  eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk viuh laLFkkxr lg;ksx ;kstuk ds rgr vc rd fnYyh ds fofHkUu {ks=ksa dh fuEu pkj laLFkkvksa }kjk vk;ksftr dfo lEesyu ,oa lkaLd`frd dk;ZØe esa lg;ksx iznku fd;k tk pqdk gS %&

16 vxLr] 2015 Lora=rk fnol dfo lEesyu % fnYyh ljdkj dh *fnYyh lsfyczsV ;kstuk* ds rgr eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk Lora=rk fnol ds volj ij dfo lEesyu dk vk;kstu vktkn Hkou] vkbZlhlhvkj] bUnzizLFk ,LVsV] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA dk;ZØe esa eq[; vfrfFk ds :i esa Jh dfiy feJk] ekuuh; dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk ea=h] fnYyh ljdkj i/kkjsA lEekfur vfrfFk ds :i esa ofj’B i=dkj Jh jkecgknqj jk; ,oa fof”k’V vfrfFk ds :i esa lfpo] Hkk’kk foHkkx i/kkjsaA v/;{krk vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; falag us dhA dfo lEesyu dk lapkyu Jh xq#pj.k flag* us fd;kA dfo lEesyu esa eSfFkyh ds dfo xaxs”k xqatu] ;ksxkuUn ghjk] jeu dqekj] jfoUnzukFk Bkdqj rFkk Hkkstiqjh ds dfo vy[k vukM+h] xq#pj.k flag] xksj[k izlkn *eLrkuk* pUnz”ks[kj feJ] tksgj “kfQ;koknh us dkO; ikB fd;kA

19 vxLr] 2015 fcgkj lEeku lekjksg % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *fcgkj lEeku lekjksg* dk vk;kstu ekoyadj lHkkxkj] dkWfUlVVw”ku Dyc] jQh ekxZ] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA lekjksg esa eq[; vfrfFk ds :i esa fcgkj ds ekuuh; eq[kea=h Jh uhfr”k dqekj ,oa fof”k’V vfrfFk ds :i esa fnYyh ds ekuuh; eq[;ea=h Jh vjfoUn dstjhoky i/kkj jgs gSaA lekjksg dh v/;{krk dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk ea=h Jh dfiy feJk djsaxsA bl volj ij eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh Hkk’kk ,oa laLd`fr ds {ks= esa viuk vewY; ;ksxnku iznku djus ds fy, MkW0 jek”kadj JhokLro ¼f”k{kk ,oa lkfgR;½] Jh xaxs”k xqatu ¼lkfgR; o vkapfyd dkO;½] MkW0 jru yky ¼f”k{kk ,oa lkekftd psruk½] MkW0 lh-ih-jk; ¼LokLF; lsok] g`n~; jksx½] Jh egsUnz izlkn flag ¼dyk] ukV~; deZ½] Jh iwue nqcs ¼thou “kSyh½] Jh vfuy feJk ¼laxhr½ ,oa Jh izdk”k >k ¼dyk] ukV~; deZ½  dks *fcgkj lEeku* ls lEekfur fd;k tk,xkA  lkFk gh bl volj ij fnYyh fo/kku lHkk ds fy, pqus x, iwokZapy ds ekuuh; fo/kk;dksa dks Hkh lEekfur fd;k x;kA

31 vDVwcj] 2015 ls 3 uoEcj] 2015 yksd mRlo lekjksg fnYyh ljdkj dh *fnYyh lsfyczsV ;kstuk* ds rgr eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh }kjk *yksd mRlo lekjksg* dk;Zdze dk vk;kstu fnukad 31 vDVwcj] 2015 ,oa 1 uoEcj] 2015 dks nknk nso xzkm.M] ¼jkeyhyk eSnku½] ikye ¼fudV }kjdk½ ubZ fnYyh 2 uoEcj] 2015 dks ohj dq¡oj flag ikdZ] ukaxyksbZ] fnYyh rFkk 3 uoEcj] 2015 dks Iys xzkm.M] cSad ,UDyso] y{eh uxj] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa fnukad 31 vDVwcj] 2015] 2 ,oa 3 uoEcj] 2015 dks Jh mn;ukjk;.k flag us vius lkfFk;ksa ds lkFk *ohj dq¡oj flag* dh xkFkk dk ukV~; eapu fd;k rFkka 1 ,oa 3 uoEcj] 2015 dks eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh dqat fcgkjh us viuh izLrqfr dhA dk;Zdze esa lkfUu/; vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; flag ,oa Jh jes”k frokjh] lfpo] Hkk’kk foHkkx] fnYyh ljdkj dk izkIr gqvkA fnukad 31 vDVwcj] 2015 dks lEekfur vfrfFk ds :i esa lqizfl) ofj’B i=dkj Jh jkecgknqj jk;] fnukad 2 uoEcj] 2015 dks Jh egsUnz ;kno] LFkkuh; fo/kk;d ,oa fnukad 3 uoEcj] 2015 dk usiky ds jktiwr Jh nhi dqekj mik/;k; fof”k’V vfrfFk ds :i esa i/kkjsaA

17 uoEcj] 2015    NB iwtk ds volj ij dk;ZØe % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh us NB egkioZ ds ekSds ij igyh ckj fnYyh ds fofHkUu 18 txgksa ij lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu o izksRlkgu fd;k gSA bu txgksa ij NB ds volj ij lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu xSj ljdkjh vkSj jgoklh laxBuksa ds tfj, fd;k x;k gSA

bu dk;Zdzeksa ds tfj, vdkneh us iz;kl fd;k fd bykgkckn ls ysdj iwjs iwohZ mRrj izns”k] fcgkj] >kj[k.M] NRrhlx<+ vkSj caxky ds ekynk ohjHkwfe] lksukiqj tSls lhek ls yxs bykdksa esa csgn J)k ls lfn;ksa ls xk, tk jgs yksd xhrksa dks muds ewy Lo:i esa gh izLrqr fd;k tk,aA ftls eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d@xkf;dkvksa us NB lacaf/kr “kkL=h; vkSj yksd ekU;rkvksa dks u`R; vkSj xk;u ds tfj, vius ijEijkxr Lo:i esa yksxksa rd igq¡pk;k x;kA bl volj ij lksfu;k fcgkj] igys iqLrs ij Jh lqthr vks>k ,oa Jherh Jko.kh Hkwifr] d`’.k dqat iqLrs] y{eh uxj esa Jh /khjt dqekj “kekZ ,oa Jh uhjt flag] ohj dq¡oj flag ikdZ] ukaxyksbZ esa Jh eqds”k *euekSth*] gkFkh ?kkV] vkbZVhvks esa Jh eqds”k dqekj flag] NB ?kkV eaxksy iqjh esa Jh “kSysUnz dqekj flag] fodkl uxj essa Jh Hkksyk ik.Ms;] Mkcjh ?kkV esa Jh nhid f=ikBh] ih&CykWd eaxksy iqjh esa Jh lqUnje] fdjkM+h esa Jh lquhy *lqfjyk*] ujsyk esa Jherh e/kqfydk] iszeckM+h iqy ij Jh lokZuUn Bkdqj lh&, Cykd “kkyhekj ckx esa Jherh dYiuk feJk] fo|kifr ?kkV] U;w v”kksd uxj esa Jh yksds”k Hkkj}kt] dqnfjl;k ?kkV ij lanhi xzqi] vkj-ds-iqje esa Jh fujatu dqekj oekZ] eksrh ckx esa Jh nsokuUn >k ,oa vk;k uxj dkyksuh esa Jh izoh.k lezkV vkfn dykdkjksa us viuh izLrqfr ls lHkh dk eueksg fy;kA vdkneh ds lg;ksx ls vk;ksftr vusd dk;Zdzeksa esa fnYyh ljdkj ds dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk ea=h Jh dfiy feJk ,oa vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us Lo;a mifLFkr gksdj dk;Zdze dk vkuUn fy;kA

18 fnlEcj] 2015   fHk[kkjh Bkdqj t;arh % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk Hkkstiqjh ds lqizfl) ukVddkj fHk[kkjh Bkdqj dh t;arh ds volj ij *Hkkstiqjh jaxdeZ vkSj fHk[kkjh Bkdqj* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu fgUnh Hkou esa fd;k x;kA laxks’Bh dh v/;{krk lqizfl) lkfgR;dkj izks0 xksis”oj flag us dhA lkfUu/; vdkneh ds mik/;{k ,oa ofj’B i=dkj Jh dqekj latkW; flag dk izkIr gqvkA oDrk ds :Ik esa izks0 lquhy frokjh ,oa izks0 vpZuk mik/;k; Hkkx fy;kA laxks’Bh dk lapkyu lqizfl) Hkkstiqjh lkfgR;dkj MkW0 Vh-,u-vks>k us fd;kA bl volj ij MkW0 lqrks’k us Hkh viuk ,d vkys[k izLrqr fd;kA

vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us vdkneh ds dk;Zdzeksa dh tkudkjh nsrs gq, crk;k fd vdkneh us vHkh *NB iwtk* ds volj ij 18 LFkkuksa ij lkaLd`frd dk;Zdzeksa dk vk;kstu fd;kA mUgksaus crk;k fd gekjh dksf”k”k gS fd ge fnYyh esa eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh ds vf/kd ls vf/kd dk;Zdze vk;ksftr djsaxsA

v/;{kh; oDrO; nsrs gq, izks0 xksis”oj flag us dgk fd fHk[kkjh Bkdqj Hkkstiqjh lekt dss fuekZrk Fks mUgksaus vius ukVdksa ds ek/;e ls lekt lq/kkj dh fn”kk esa Bksl dk;Z fd;kA fcnsfl;k ukVd esa mUgksaus ifr ds fons”k tkus ij mldh iRuh ds fo;ksx dk cgqr gh ekfeZd fp=.k fd;k gSA blhfy, fcnsfl;k yksd ukVd ds :Ik esa fo[;kr gSA mUgksaus crk;k fd vkt lekt ls fHk[kkjh Bkdqj dh ijEijk lekIr gks jgh gSA mudh ijEijk dks iqu% thfor djuk gksxk vkSj bl nkf;Ro dks eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh dks mBkuk pkfg,A

izks0 lquhy frokjh us viuk vkstLoh oDrO; nsrs gq, dgk fd izfrHkk”kkyh O;fDr u dsoy viuk fuekZ.k djrk gS cfYd lekt dk Hkh fuekZ.k djrk gSA oSlh gh izfrHkk ls lEiUu Fks fHk[kkjh BkdqjA og jaxdeZ ds izgjh FksA mUgksaus crk;k fd fgUnh ,oa Hkkstiqjh lqizfl) lkfgR;dkj jkgqy lkad`R;ku us fHk[kkjh Bkdqj dks Hkkstiqjh dk vxznwr ekuk gSA

3 tuojh] 2016 eSfFkyh % yksd vk lkfgR; ¼eSfFkyh laxks’Bh½ % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *eSfFkyh % yksd vk lkfgR;* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu jfookj dh “kke fgUnh Hkou esa fd;k x;kA vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; eas gqbZ laxks’Bh dh v/;{krk lqizfl) lkfgR;dkj Jh xaxs”k xqatu us dhA  eSfFkyh ds ekStwnk lkfgfR;d Lo:i] fefFkykapy ds yksxksa dh lkfgfR;d vfHk:fp esa vk, xq.kkRed ifjorZu] fefFkyk {ks= ds yksxksa dh lkekftd i`’BHkwfe ds fygkt ls mudk lkfgR; esa vkSj lkfgR; dk muesa ljksdkj] fnYyh esa jg jgs yksxksa ds chp ekStwnk eSfFkyh lkfgR; dk lanHkZ tSls egRoiw.kZ fcUnqvksa ij gqbZ ppkZ esa oDrk ds :Ik esa MkW0 Kkurks’k >k] izkpk;Z] vkRekjke lukru /keZ dkWyst] Jh xkSjh ukFk] f”k{kkfon~] Jherh euh’kk >k] f”k{kkfon~ ,oa Jh vdcj fjt+oh] leh{kd us Hkkx fy;kA laxks’Bh dk lapkyu fnYyh fo”ofo|ky; ds izk/;kid vkSj vdkneh ds lnL; MkW0 jkts”k dqekj >k us fd;kA

laxks’Bh ds igys oDrk ds rkSj ij Jh xkSjh ukFk us ppkZ ds cgqr gh laosnu”khy fcUnq dks NqvkA mUgksaus dgk fd vc rd eSfFkyh ,d oxZ fo”ks’k ds opZLo dh Hkk’kk cudj jg xbZ gSA blesa lekt ds 95 izfr”kr yksxksa dk equkflc izfrfuf/kRo ugha gks ik jgk gSA Hkk’kk dks yksd ls tksM+us dk iz;kl gh eSfFkyh dks loZLohdk;Z Hkk’kk cuk ldrk gSA blds fy, nfyr] fiNMk vkSj vYila[;d tks eSfFkyh cksyrs&cjrrs gSa] mls eku nsus dh vko”;drk gSA yksfjd xkFkk] jktk lgys”k] nhuk Hknzh tSls vketuksa ds yksd ukVd vkSj xhr dks Hkjiwj eku feyuk pkfg,A

Jherh euh’kk >k us Jh xkSjh ukFk dh ckr dk vkaf”kd leFkZu djrs gq, dgk fd eSfFkyh ds Js`’B lkfgR; dks yksd lkfgR; ls tksM+us vkSj mlls tqM+us dh vko”;drk gSA mUgksaus dgk fd rHkh eSfFkyh ds 95 izfr”kr yksx eq[;/kkjk esa viuh ekStwnxh eglwl dj ik,axsA lkFk gh mUgkasus tksj nsdj dgk fd eSfFkyh dk yksd lkfgR; dkQh le`) gS vkSj mlesa lSdM+ksa lky igys Hkh nfyr foe”kZ]sa L=h foe”kZ] i;kZoj.k fpUrk rFkk yksd O;ogkj dh fpUrk cgqrk;kr esa gSA yksd lkfgR; esa mnk~Rr uk;d dk izfrLFkkiu njvly lkekftd ckSn dks ewY;ksa ls tksM+us dk jpukRed iz;kl gSA

Jh vdcj fjt+oh us dgk fd gesa Hkk’kk dks ysdj vfr “kq)rkoknh n`f’Vdks.k NksM+uk gksxkA mUgksaus dgk fd Hkk’kk esa vkus okys {ks=h; cnyko dks Hkh le>uk gksxkA blh otg ls njHkaxk ds f”k’Vtu dh Hkk’kk ls Hkh vfr lqdksey e/kqcuh ds vYila[;dksa dh cksyh Hkk’kk gSA eSfFkyh ds foLrkj ds fy, vc cgqr t:jh gks x;k gS fd mlds ekStwnk :i ij xaHkhj ppkZ dh tk,A

MkW0 Kkurks’k >k dgk fd Hkk’kk dk viuk lkSan;Z gksrk gSA ysfdu ;g lkSan;Z ekud esa jgdj ugha fu[kj ldrkA ekud esa jgdj dksbZ Hkk’kk fodkl ughas dj ldrhA gesa viuh Hkk’kk dks ysdj vius vanj O;kIr ghu Hkkouk dks feVkuk gksxkA rHkh gekjh Hkk’kk vkSj lkfgR; le`) gksxk vkSj rHkh laLd`fr dk fodkl gksxkA ysfdu yksx viuh Hkk’kk dks cksyus esa ladksp djrs gSA gesa bl ghu Hkkouk dks eu ls fudkyuk gksxkA

vkf[kj esa v/;{k  Jh xaxs”k xqatu us lHkh oDrkvksa ds fopkjksa dh ppkZ djrs gq, dgk fd ;g LFkkfir lR; gS fd yksd dsfUnzr lkfgR; gh fpjUru gks ldrk gS vkSj ;gh lkfgR;dkjksa ds fy, Hkh lcls cM+h pqukSrh gksrh gSA eSfFkyh Hkk’kk Hkh vius vuqHkoksa ds vk/kkj ij yksd Hkkouk vkSj yksd ih<+h ds fy, T;knk ls T;knk laosnu”khy gksrh tk jgh gSA

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10 tuojh] 2016 x.kra= fnol dfo lEesyu % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *fnYyh lsfyczsV* ds rgr x.kra= fnol ds volj ij jk’Vªh; dfo lEesyu dk vk;kstu dekuh lHkkxkj] e.Mh gkml] ubZ fnYyh esa vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; vkSj ns”k ds lqizfl) dfo Jh dqekj fo”okl dh v/;{krk esa fd;k x;k] ftlesa ns”kHkj ds lqfo[;kr eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh dfo;ksa us dkO; ikB djds lHkh dk eueksg fy;kA dk;ZØe esa eq[; vfrfFk ds :i esa Jh dfiy feJk] ekuuh; dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk ea=h] fnYyh ljdkj i/kkjsA dfo lEesyu dk lapkyu eSfFkyh ds dfo Jh fl;kjke >k ljl* us fd;kA

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24 tuojh] 2016 Hkkstiqjh lkfgR; esa L=h foe”kZ ¼Hkkstiqjh laxks’Bh½ % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *Hkkstiqjh lkfgR; esa L=h foe”kZ* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu egkjktk vxzlsu dkWyst] olqU/kjk ,UDyso] fnYyh esa vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; vkSj ofj’B i=dkj Jherh xhrkJh dh v/;{krk esa fd;k x;kAeq[; oDrk ds :Ik esa ofj’B i=dkj Jh fl)kFkZ feJ rFkk oDrk ds :Ikesa MkW0 vpZuk mik/;k;] MkW0 laxhrk jk; o MkW0 Lokfr dqekjh us Hkkx fy;kA vfrfFk;ksa dk Lokxr vdkneh ds lnL;] MkW0 rst ukjk;.k vks>k us fd;k rFkk lapkyu vdkneh dh lnL;k Jherh jf”e fiz;n”kZuh us fd;kA

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13&14 Qjojh] 2016 ;qok egksRlo % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk vk;ksftr nks fnolh; *;qok egksRlo* esa fnYyh ds fofHkUu fo|ky;ksa vkSj egkfo|ky;ksa ds lSdM+ksa Nk=@Nk=kvksa us ftl rjg c<+&p<+dj fgLlsnkjh dh og lpeqp pkSadkus okyk jgkA egkjktk vxzlsu dkWyst ds lHkkxkj esa ukSoha ls Lukrd ds Nk=ksa ds fy, *dfork] fuca/k] xk;u ,oa u`R; izfr;ksfxrkvksa* dk vk;kstu fd;k x;kA pkSadkus okyh ckr dsoy izfrHkkfx;ksa vkSj Jksrkvksa&n”kZdksa dh cM+h rknkn gh ugha Fkh cfYd ftl rjg iwokZapy dh Hkk’kkvksa esa mRd`’V ys[k ,oa dfork,a feyh mldh Hkh mEehn ugha dh xbZ FkhA blds vykok bl u, nkSj esa ;qokvksa ds cnyrs :>ku ds fygkt ls xk;u izfr;ksfxrk esa lksgj] dtjh] Bqejh vkfn dh izLrqfr Hkh lq[kn vk”p;Z dk fo’k; jghA u`R; esa Hkh vksfMlh] dRFkd] HkjrukV~;e lesr ik”pkR; “kSyh esa Hkh ;qokvksa us cgqr gh lqUnj Hkkxhnkjh dhA vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa gq, bl egksRlo esa gj izfr;ksfxrk esa izFke] f}rh;] r`rh; vkSj ikap&ikap izksRlkgu iqjLdkj fn, x,A

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izfr;ksfxrkvksa esa izFke] f}rh;] r`rh; ,oa izksRlkgu ¼ikap½ LFkku izkIr djus okys Nk=ksa dks iqjLdkj Lo:i Øe”ka% 5100@&] 4100@&] 3100@& ,oa 2100@& #i;s dh jkf”k] izrhd fpg~u ,oa izek.k i= iznku fd, x,A bl nks fnolh; ;qok egksRlo dk lapkyu vdkneh ds lnL; MkW0 Vh-,u-vks>k ,oa Jherh jf”e fiz;n”kZuh  us fd;kA

21 Qjojh] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa xkMZu VwfjTe QsfLVoy ds volj ij lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesa Hkkstiqjh dh lizfl) xkf;dk Jherh ekfyuh voLFkh us viuh izLrqfr ls dk;Zdze esa mifLFkr lHkh vfrfFk;ksa ,oa Jksrkvksa dk eueksg fy;kA

27&28 Qjojh] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa fnYyh gkWV vkbZ-,u-,- esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesa fnukad 27 Qjojh] 2016 dks eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh lqUnje rFkk 28 Qjojh] 2016 dks Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh lqjthr vks>k us viuh izLrqfr ls lHkh dk eueksg fy;kA

5 ekpZ] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa fnYyh gkWV vkbZ-,u-,- esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesa eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh nsokuUn >k us viuh izLrqfr ls lHkh dk eueksg fy;kA

12 ekpZ] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa fnYyh gkWV ihre iqjk esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesa Hkkstiqj ,oa eSfFkyh ds lqizfl) xkf;dk Jherh dYiuk feJk us viuh izLrqfr ls lHkh dk eueksg fy;kA

19 ekpZ] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa fnYyh gkWV vkbZ-,u-,- esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesa Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh cychj flag us viuh izLrqfr ls lHkh dk eueksg fy;kA

27 ekpZ] 2016 lkaLd`frd la/;k % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh dh lkaLd`frd la/;k esa iwokZapy dksfdyk MkW0 “kkjnk flUgk us vius xhrksa ls leka cka/kkA iwokZapy ds yksdxhrksa dks jk’Vªh; Lrj ij yksdfiz; cukus dk lcls vf/kd Js; “kkjnk th dks tkrk gSA “kkjnk th us vius e”kgwj J`axkfjd yksdxhr *ifu;k ds tgkt ls iyVfu;k ys ys vbg fi;k* ls [kpk[kp Hkjs gkWy esa yksxksa dks >qek;k rks egsUnz feJ ds fy[ks xhr *jksbZ&jksbZ ifr;k fy[kkos jtefr;k* lqukdj lcdh vk¡[ksa ue dj nhA fnYyh esa laHkor% igyh ckj fdlh vkf/kdkfjd eap ls dksbZ gtkj lky iqjkuh vkYgk dh vn~Hkqr ohjxkFkk dk xk;u gqvkA Jh jkes”oj xksi us Hkkstiqjh esa vkYgk dh “kkunkj izLrqfr dhA lHkkxkj esa bl xk;u ij tks”k] mRlkg vkSj ohjksfpr Hkko tSls fgyksjs Hkj jgk FkkA

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laLFkkxr lg;ksx ;kstuk % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk viuh laLFkkxr lg;ksx ;kstuk ds rgr vc rd fnYyh ds fofHkUu {ks=ksa dh fuEu pkj laLFkkvksa }kjk vk;ksftr dfo lEesyu ,oa lkaLd`frd dk;ZØe esa lg;ksx iznku fd;ktk pqdk gS %&


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1-

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16-9-2015

2-

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21-10-2015

3-

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17-11-2015

4-

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17-11-2015

5-

eS0 ifo= NB fodkl lfefr] eaxksy iqjh

17-11-2015

6-

eS0 tufgr NB lfefr fnYyh

D;w Cykd] eaxksy iqjh]

17-11-2015

7-

eS0 n`f’V yksd Qkm.Ms”ku ,.M lks”ky fjlpZ lkslk,Vh]dq¡oj ohj flag uxj] ukaxyksbZ]

17-11-2015

8-

eS0 Hkkstiqjh LokfHkeku NB iwtk lfefr]fdjkM+h

17-11-2015

9-

eS0 tufgr iwokZapy lkslklVh] ujsyk

17-11-2015

10-

ekuuh; mik/;{k] fnYyh fo/kku lHkk

¼ugj ij izseckM+h iqy ls flaxyiqj xkao½

17-11-2015

11-

ekuuh; mik/;{k] fnYyh fo/kku lHkk

lh&, Cykd] iqy ds utnhd

17-11-2015

12-

eS0 NB iwtk lfefr] e.Mkoyh] Qktyiqj] fnYyh

17-11-2015

13-

vf[ky Hkkjrh; izoklh fefFkyk fodkl laxBu

U;w v”kksd uxj] fnYyh

17-11-2015

14-

eS0 egk NB lw;Z ukjk;.k iwtk lfefr]

vkuUn ioZr] ubZ fnYyh

17-11-2015

15-

ekuuh; dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk] fn0 l0

¼,&Cykd] lksfu;k fogkj jsthMsaV~l oSyQs;j ,lksfl,”ku] lksfu;k fogkj] fnYyh½

17-11-2015

16-

eS0 NB iwtk lfefr] vkj-ds- iqje] ubZ fnYyh

17-11-2015

17-

eS0 iwokZapy NB iwtk ,oa lkaLd`frd lfefr

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17-11-2015

18-

eS0 iwokZapy NB ,oa lkaLd`frd fodkl lfefr

vk;k uxj dkyksuh] ubZ fnYyh

17-11-2015

19-

eS0 NB iwtk ioZ lfefr] ] d`’.k dqat ,DlVsa”ku]y{eh uxj] fnYyh

17-11-2015

20-

eS0 izSl Dyc vkWQ bafM;k     

28-11-2015

21-

eS0 fHk[kkjh Bkdqj Le`fr U;kl

19-12-2015

22-

eS0 fnYyh isjkesfMdy Vsduhdyh deZpkjh QsMjs”ku

30-01-2016

23-

eS0 dykJh

04-02-2016

24-

eS0 ljLorh ,twds”ku lkslk,Vh

12-02-2016

25-

eS0 iwokZapy ekspkZ ;qok laxBu

12-02-2016

26-

eS0 dEisax QkWj ysXost bD;wfyVh jkbV

21-02-2016

27-

eS0 “kfDr oSyQs;j ,lksfl,”ku

20-03-2016

 








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1- fcgkj lEeku% eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk bl o’kZ eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh ds izpkj&izlkj esa fofHkUu {ks=ksa tSls lkfgR;] f”k{kk] fpfdRlk] laxhr] ukVd vkfn esa mYys[kuh; ;ksxnku iznku djus okys fo)kuksa dks *fcgkj lEeku* ls lEekfur fd;k x;kA

2- izdk”ku lg;ksx % vdkneh }kjk viuh izdk”ku lg;ksx ;kstuk ds rgr ;qok jpukdkjksa dks ik.Mqfyfi izdk”ku ds fy, vkfFkZd lg;ksx iznku fd;kA

3- ;qok egksRlo % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk igyh ckj *;qok egksRlo* dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesa Nk=ksa ds fy, fuca/k izfr;ksfxrk] dfork izfr;ksfxrk] xk;u izfr;ksfxrk ,oa u`R; izfr;ksfxrk dk vk;kstu fd;k x;kA

4- NB iwtk % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk o’kZ 2015&16 esa igyh ckj *NB egksRlo* ds volj ij fnYyh ds fofHkUu {ks=ksa esa laLFkkvksa ds lkFk feydj *lkaLd`frd dk;Zdz* dk vk;kstu fd;k x;kA

7 viSzy] 2016 jaxkjax dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk esu efV;kyk jksM] efV;kyk ubZ fnYyh esa jaxkjax dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA dk;ZØe esa eq[; vfrfFk ds :i esa Jh vjfoUn dstjhoky ekuuh; eq[;ea=h fnYyh ,oa v/;{k] eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh i/kkjsA lEekfur vfrfFk ds :i esa ekuuh; fo/kk;d Jh xqykc flag ;kno mifLFkr FksA dk;Zdze esa eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh fodkl >k ,oa Jh iadt xqIrk us vius xhrksa dh izLrqfr dhA

11 viSzy] 2016 jaxkjax dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk bfUnjk dY;k.k fogkj] Mh-Mh-,-ikdZ] fudV ,e-lh-Mh LVksj] Mh Cykd] rsg[k.M] ubZ fnYyh esa jaxkjax dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA dk;ZØe esa eq[; vfrfFk ds :i esa Jh vjfoUn dstjhoky ekuuh; eq[;ea=h fnYyh ,oa v/;{k] eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh i/kkjsA lEekfur vfrfFk ds :i esa ekuuh; fo/kk;d Jh lgh jke mifLFkr FksA dk;Zdze esa Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh jktw flag us vius xhrksa dh izLrqfr dhA

17 viSzy] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesaa Hkkstiqjh@eSfFkyh dh lqizfl) xkf;dk lqJh LofIuy oekZ us vius eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh ds xhrksa ls lHkh dk eueksg fy;kA

24 viSzy] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesaa eSfFkyh dh lqizfl) xkf;dk lqJh vatq >k us vius xhrksa ls lHkh dk eueksg fy;kA

30 viSzy] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk fnYyh ljdkj ds VwfjTe foHkkx ds la;qDr rRoko/kku esa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA ftlesaa Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh lokZuUn Bkdqj us vius xhrksa ls lHkh dk eueksg fy;kA

6 ls 18 twu] 2016 eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk xzh’ekodk”k ds nkSjku cPpksa ds fy, eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk dk vk;kstu Hkkstiqjh dh lqizfl) u`R;kaxuk lqJh ufyuh&dkefyuh dh laLFkk *laxhfrdk* ds lkFk la;qDr :i ls dM+dM+Mwek] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa yxHkx 45 Nk=ksa us eSfFkyh&Hkkstqijh xk;u ,oa u`R; dk izf”k{k.k izkIr fd;kA

6 ls 18 twu] 2016 eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk xzh’ekodk”k ds nkSjku cPpksa ds fy, eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk dk vk;kstu lqizfl) u`R;kaxuk MkW0 dfork Bkdqj dh laLFkk *dykJh* ds lkFk la;qDr :i ls ,YgdkWu bUVjus”kuy Ldwy] e;wj fogkj] Qsl&1] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa yxHkx 40 Nk=ksa us eSfFkyh&Hkkstqijh xk;u ,oa u`R; dk izf”k{k.k izkIr fd;kA

6 ls 18 twu] 2016  eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk xzh’ekodk”k ds nkSjku cPpksa ds fy, eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk dk vk;kstu lqizfl) u`R;kaxuk lqJh f”k[kk [kjs dh laLFkk *lkfUu/; dYpj lkslk,Vh* ds lkFk la;qDr :i ls vfHkuo Xykscy ifCyd Ldwy] }kjdk] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa yxHkx 25 Nk=ksa us eSfFkyh&Hkkstqijh xk;u ,oa u`R; dk izf”k{k.k izkIr fd;kA

12 tuw] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk cqjkM+h {ks= dh turk ds fy, lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fd;k x;kA dk;Zdze esa eq[; vfrfFk ds :i esa ekuuh; eq[;ea=h] fnYyh ,oa v/;{k] eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh i/kkjsA fof”k’V vfrfFk LFkkuh; fo/kk;d Jh latho >k mifLFkr FksA Hkkstiqjh dh lqizfl) xkf;dk lqJh nsoh ,oa eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh fodkl >k us lkaLd`frd dk;Zdze izLrqr dj lHkh dk eu eksg fy;kA

19 twu] 2016 eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R; dk;Z”kkyk dk lekiu lekjksg % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk xzh’ekodk”k ds nkSjku cPpksa ds fy, fnYyh ds fofHkUu {ks=ksa esa *eSfFkyh&Hkkstiqjh xk;u ,oa u`R;* dh iUnzgk fnolh; rhu dk;Z”kkykvksa vk;kstu dM+dM+Mwek] e;wj fogkj Qsl&1 ,oa }kjdk esa fd;k x;k FkkA bldk lekiu lekjksg egkjktk vxzlSu dkWyst] olqU/kjk ,UDyso] fnYyh ljnkj oYyHk HkkbZ iVsy lHkkxkj esa gqvkA lekiu lekjksg esa rhuksa dk;Z”kkykvksa esa Hkkx ysus okys 110 Nk=@Nk=kvksa us jaxkjax izLrqfr dhA mUgsa vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us izek.k&i= iznku fd,A

lekiu lekjksg esa vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us dgk fd “kS{kf.kd laLFkkuksa esa yEch NqV~Vh ds nkSjku bu dk;Z”kkykvksa dk vk;kstu djus ds ihNs vdkneh dk mn~ns”; ;g Fkk fd cPps vius izf”k{k.k ij iw.kZ /;ku ns ldsa vkSj voljksa ds vHkko esa lkeus u vk ik;h izfrHkkvksa dks fu[kkjk tk ldsA vdkneh bu dk;Z”kkykvksa esa izf”kf{kr cPpksa esa ls vPNk djus okys cPpksa dks u dsoy ns”k esa cfYd fons”kksa esa Hkh cM+s eap rd igq¡pkus esa lfØ; lg;ksx djsxhA

dM+dM+Mwek esa vk;ksftr dk;Z”kkyk esa lqJh ufyuh&defyuh us dFkd ds lqizfl) xq: Jh ftrsUnz egkjkt ds funsZ”ku esa cPpksa us fo|kifr dh HkSjoh oUnuk vkSj Hkkstijh xk;u o u`R; dh izLrqfr dhA cPpksa }kjk Hkkstiqjh dh pSrh dh Hkh euksgkjh izLrqfr dh xbZA e;wj fogkj Qsl&1 esa dk;Z”kkyk dk vk;kstu lqizfl) u`R;kaxuk MkW0 dfork Bkdqj ds funsZ”ku esa gqvkA ;gk¡ ds cPpksa us Hkh HkSjoh xk;u o u`R; dh izLrqfr ls ysdj vU; fo/kkvksa esa “kkunkj dk;Zdze is”k fd;kA }kjdk dh dk;Z”kkyk dFkd dh u`R;kaxuk lqJh f”k[kk [kjs ds ekxZn”kZu esa lEiUu gqbZA lekiu lekjksg esa lqJh [kjs ds izf”kf{kr cPpksa us Hkh dk;Zdze izLrqr fd;kA

vdkneh ds lfpo] MkW0 gfjlqeu fc’V us dgk fd ukephu dykdkjksa ds funsZ”ku esa gj yEcs “kS{kf.kd vodk”k ds nkSjku ,slh dk;Z”kkykvksa dk vk;kstu fd;k tkrk jgsxkA rkfd iwokZapy Hkk’kkvksa ls tqM+h cky izfrHkvksa dks Hkjiwj ekSdk fey ldsA 

vdkneh ds lnL; MkW0 Vh-,u-vks>k us /kU;okn Kkiu djrs gq, dk;Z”kkyk esa fgLlk ysus okys cPpksa vkSj [kklrkSj ij muds vfHkHkkodksa dk lk/kqokn fd;k ftUgksaus vdkneh ds izLrko dks xaHkhjrk ls fy;kA mUgksaus xq: ftrsUnz egkjkt lfgr lHkh izf”kf{kdksa vkSj vk, vfrfFk;ksa dk /kU;okn fd;kA

13 vxLr] 2016 eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk Lora=rk fnol ds volj ij *jk’Vªh; dfo lEesyu* dk vk;kstu lqizfl) lkfgR;dkj MkW0 fuR;kuUn frokjh dh v/;{krk vkSj vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa I;kjs Hkou] cgknqj”kkg tQj ekxZ] ubZ fnYyh esa lEiUu gqvkA dfo lEesyu esa fof”k’V vfrfFk ds :Ik esa Jh dfiy feJk] ekuuh; dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk ea=h] fnYyh ljdkj i/kkjsaA bl volj ij fnYyh ljdkj ds Hkk’kk lfpo] Jh ,u-ds-“kekZ Hkh mifLFkr FksA jk’Vªh; xk;u vkSj fo|kifr dh g`n;Li”khZ HkSjoh oUnuk ds lkFk lekjksg dh xfjeke; “kq:vkr gqbZA

lekjksg ds fof”k’V vfrfFk Jh dfiy feJk us dgk fd vdkneh iwokZapyh Hkk’kkvksa ds izpkj&izlkj ds fy, fofHkUu vk;kstuksa ds ek/;e ls iz;kljr gS vkSj chrs dqN le; esa vdkneh ds vk;kstuksa esa tqV jgh HkhM+ bldh lQyrk dk lwpd gSA mUgksaus dgk fd fnYyh ljdkj Hkkjrh; Hkk’kkvksa ds lEc)Zu ds fy, iwjh rjg ls d`rladYi gSA blhfy, lHkh Hkk’kkbZ vdknfe;ksa dh lfØ;rk dkQh c<+ xbZ gSA

bl volj ij vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us dgk fd ;g vdkneh iwokZapy ds eku dh izrhd eSfFkyh vkSj vku dh izrhd Hkkstiqjh lesr lHkh iwokZapyh Hkk’kkvksa&cksfy;ksa dk fodkl djus ds fy, d`rlaadYi gSA mUgksaus dgk fd gtkj lky ls Hkh igys jkt”ks[kj dg x, gSa fd lRrk vkSj lkfgR; dk xgjk laca/k gSA mnkjg.k ds fy, dkfynkl *j?kqoa”k* esa izrkih lezkV j?kq ds VSDl ysus vkSj fQj turk dks lqfo/kk nsus dk o.kZu djrs gSaA iztk ls dj dh olwyh ,sls tSls ckny leqnz ls ty ysrs gSaA vkSj okilh ;kuh turk dks lqfo/kk,a ,sls tSls ckny ml lafpr ty dks cjlkr ds :Ik esa /kjrh ds iksj&iksj dks ljkcksj djds tu&thou dks gf’kZr dj nsrs gSaA gekjs lkfgR; esa ,sls vusdksa izlax gSa] tks vkt dh lRrk dks Hkh lkFkZd lans”k nsrs gSaA vko”;drk gSa mUgsa le>us vkSj cjrus dhA

vius v/;{kh; oDrO; esa MkW0 fuR;kuUn frokjh us dgk fd reke Hkkjrh; dfo;ksa esa fo|kifr ls cM+k ukjh eu dk dksbZ fprsjk mUgsa ugha fn[krkA eSfFkyh ds bl egku dfo us euq’; dh Lora=rk dks Hkh viuh jpukvksa esa Ik;kZIr LFkku fn;k gSA mUgksaus dgk fd *o`) ;qok* ckcw ohj dq¡oj flag iwokZapy gh ugha iwjs Hkkjrh; ekul esa Lora=rk ds izfr vikj J)k dk izrhd gSaA

bl volj ij eSfFkyh ds lqizfl) dfo loZJh xaxs”k xqatu] rkjkuUn >k *r:.k*] vjfoUn feJ *uhjt*] Jherh dqedqe >k] lqJh Lokfr “kkdEcjh rFkk Hkkstiqjh ds lqizfl) dfo MkW- xq#pj.k flag] MkW- tkSgj “kfQ;koknh] jkts”k dqekj ek¡>h] vuqi ik.Ms;] MkW- vukfedk] Jherh vydk flUgk ,oa ljkst flag us viuh jk’Vªh; Hkkouk ls vksr&izksr jpukvksa ls lHkh dk eu eksg fy;kA eSfFkyh dfo MkW0 eatj lqyseku us eap lapkyu fd;kA vdkneh ds lfpo MkW-gfjlqeu fc’V us lHkh vfrfFk;ksa ,oa Jksrkvksa dk /kU;okn fd;kA

19 vxLr] 2016 Lokxr lekjksg ,oa lkaLd`frd dk;Zdze % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk o’kZ 2016&17 ds “kS{kf.kd l= esa eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh ds Nk=kvksa ds fy, ,d Lokxr lekjksg ,oa lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu fnYyh fo”ofo|ky; ds fejkaMk gkml dkWyst] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa Nk=ksa dks vdkneh dh xfrfof/k;ksa vkSj ;kstukvksa ls Nk=kvksa dks voxr djkrs gq, vdkneh ls tqM+s ds fy, izsfjr fd;kA Jh vkeksn >k us lkaLd`frd dk;Zdze izLrqr dj Nk=kvksa vkSj mifLFkr v/;kidksa dks vkufUnr dj fn;kA

7 flrEcj] 2016 fHk[kkjh Bkdqj vkSj Hkkstiqjh lekt % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk tkfe;k fefYy;k bLykfe;k fo”ofo|ky; ds lg;ksx *fHk[kkjh Bkdqj vkSj Hkkstiqjh lekt* fo’k; ij ,d fnolh; lsfeukj dk vk;kstu rhu l=ksa esa tkfe;k fefYy;k bLykfe;k fo”ofo|ky; esa fd;k x;kA vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa] lqizfl) lkfgR;dkj izks- fuR;kuUn frokjh] izks- eSustj ik.Ms ,oa izks- xksis”oj flag us vyx&vyx l=ksa dh v/;{krk dhA Lokxr oDrO; izks- gseyrk efg”oj us fn;kA fo’k; izorZu MkW- pUnznso ;kno us fd;kA fofHkUu l=ksa esa oDrk ds :Ik esa Jh latho] MkW- /kuta; flag] MkW- dSyk”k izdk”k flag mifLFkr FksA izFke l= fo|kFkhZ laokn ds :i esa fo”ks’k l= j[kk x;k Fkk ftlesa fo”ofo|ky; ds Nk=ksa us vius fopkj j[kdj Hkkxhnkjh dhA l=ksa dk lapkyu vdkneh ds lfpo MkW- gfjlqeu fc’V] MkW- jgeku eqlfOoj rFkk MkW- egsUnz iky “kekZ us fd;kA

bl volj ij vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; flag us dgk fd fHk[kkjh Bkdqj dk viuh dyk izfr lEi.kZ ml lhek rd igq¡p pqdk Fkk tgk¡ Ldwyh f”k{kk ugha gksus ds ckn Hkh mUgksaus vn~Hkqr “kCn lkeF;Z dk ifjp; fn;k vkSj ,slh jpuk,a dh tks lkekftd ljksdkj ds lkFk gh ,d jpukdkj esa [krjk eksy ysus dh “kfDr dk Hkh izrhd gSA fHk[kkjh Bkdqej dh 2&3 ckrsa t:j /;ku djus dh gSaA egkiafMr jkgqy lkad`frR;ku us mUgsa vux<+ ghjk dgk Fkk] rks fo}ku tkudh cYyHk “kkL=h us rks ;gk¡ rd dg x, fd “ksDlfi;j vkius fHk[kkjh Bkdqj dks ugha ns[kk] ns[kk gksrs rks vki yTkk tkrsA mUgksaus dgk fd mlesa vfr”kksfDr ryk”kh tk ldrh gS] ysfdu fHk[kkjh Bkdqj Hkkstiqjh ds lEeku dk cM+k uke gS vkSj jgsxkA

mn~?kkVu l= dh v/;{kr djrs gq, izfl) fo}ku izks- fuR;kuUn frokjh us dgk fd “ksDlfi;j Hkh ukV~;dze vkSj ys[ku nksuksa ls tqM+s FksA mUgksaus bl ckr dk vius thou dk foLej.kh; laLej.k crk;k fd mUgksaus fHk[kkjh Bkdqj dh izLrqfr dks ns[kk gSA izks- frokjh us vusd izlaxksa ls fHk[kkjh Bkdqj ls tksM+rs gq, dgk fd fHk[kkjh Bkdqj dk Kku vn~Hkqr FkkA Hkkstiqjh dk yksd lkfgR; bruk l”kDr gS fd og fdlh Hkh Js’B lkfgR; dks Hkh pqukSrh nsrs gq, mldk n`<+rk ls lkekuk djrk gSA

Lokxr oDrO; esa izks0 gseyrk efg”oj us lHkh vfrfFk;ksa dk Lokxr djrs gq, dgk fd f”k{kk O;oLFkk gh laLd`fr dh laokgd gksrh gSA bl vk;kstu ls eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh vkSj fgUnh foHkkx] tkfe;k fefYy;k us feydj ,d ubZ igy dh gSA

fo’k; izorZu djrs gq, MkW- pUnznso ;kno us dgk fd fHk[kkjh Bkdqj ds ukVdksa esa cgqr dfe;ksa ds ckn Hkh muesa Hkko egRoiw.kZ gSaA mUgkssaus nfyr lekt dks vkxs vkxs j[kdj mlesa Hkh fo”ks’k rkSj ij L=h ik= dks j[kdj vius ukVdksa dh jpuk dhA 

f}rh; l= *Hkkstiqjh lekt vkSj fHk[kkjh Bkdqj dk jaxdeZ* dh v/;{krk djrs gq, izks0 eSustj ik.Ms;  vkSj oDrk Jh latho us muds laca/k esa vusd izlaxksa ds ek/;e ls viuh oDrO; fn;kA blh izdkj r`rh; l= *yksdukVdksa esa L=h % lanHkZ fHk[kkjh Bkdqj ds ukVd* dh v/;{krk djrs gq, izks0 xksis”oj flag us dgk fd eq>s izlUurk gS fd eSa mUgha ds xkao dk gw¡A mUgksaus dgk fd tc muds ukVdksa dk eapu gksrk Fkk rks gtkjksa dh la[;k esa yksx jkr Hkj mudk ukVd ns[krs Fks vkSj lw;Z mn; ds lkFk vius ?kj tkrs FksA bruh yksdfiz;rk muds ukVdksa dh FkhA oDrk ds :i esa MkW- /kuta; flag ,oa MkW- dSyk”k izdk”k flag us Hkh vusd lanHkksZa ds ek/;e ls viuk oDrO; fn;kA

11 flrEcj] 2016 Hkkstiqjh laxks’Bh % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *dbls l¡ojh Hkkstiqjh Hkk’kk* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa vkSj lqizfl) lkfgR;dkj MkW- jkej{kk feJ *foey* dh v/;{krk fganh Hkou] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA oDrk ds :Ik esa MkW-lquhy frokjh ,oa MkW0 foeysUnq rhFkZadj mifLFkr FksA lapkyu vdkneh ds lfpo MkW0 gfjlqeu fc’V ,oa vdkneh ds lnL; MkW- Vh-,u-vks>k us la;qDr :i ls fd;kA bl volj ij fnYyh ds ljdkj ds Hkk’kk lfpo] Jh ,u-ds-“kekZ Hkh mifLFkr FksA

bl volj ij vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; flag us dgk fd Hkkstiqjh dbls l¡ojsxh bldks ysdj n`f’V cgqr lkQ gksuh pkfg,A dbZ txg yksx viuh ekr`Hkk’kk ds fodkl dks ysdj fgUnh ds c<+rs izHkko ij fpark trkrs gSaA esjk n`<+ er ;g gS fd viuh ekr`Hkk’kk ds izfr Hkjiwj J`)k vkSj lEeku ds lkFk gesa ;g ekuuk iM+sxk fd fgUnh jk’Vªh; Hkk’kk gS] tks iwjs ns”k esa gjsd rcds ds yksxksa ls lEidZ djus dk lcls ljy vkSj l{ke ek/;e gSA fgUnh gekjs ns”k vkSj iM+ksl ds lHkh ns”kksa esa laokn dk ek/;e cu pqdh gSA ftl rjg vaxzsth dk fojks/k djrs le; ;g ;kn j[kuk pkfg, fd iwjs ns”k esa lEidZ ds fy, vc fganh lcls l{ke Hkk’kk gSA blfy, ns”k esa fganh vkSj nqfu;k esa vaxzsth dh enn ls ge Kku&foKku ds lkFk jkstxkj esa viuh Hkkxhnkjh c<+k ldrs gSaA ,sls esa gekjh ekr`Hkk’kk ftlds izfr gesa vxk/k izse gS mls gesa lkfgR; esa le`) djus dh cgqr t:jr gSA D;ksafd og gekjs lekt dh tM+ksa rd dks vkSj Hkh laLdkfjr djsxhA mUgksaus vnexksaMoh dk “ksj i<+k %

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laxks’Bh dh v/;{kr djrs gq, MkW- jkej{kk feJ] *foey* us dgk fd tc rd gekjh mRrstuk fLFkj ugha gksaxh rc rd Hkkstiqjh dk fodkl laHko ugha gSA vkt Hkh fujUrj Hkkstiqjh esa ys[ku gks jgk gS] vPNk ys[ku gks jgk gSA yksx mls i<+s vkSj eu esa xqusA mUgksaus Hkkstiqjh flusek vkSj xhrksa esa v”yhyrk dks ysdj dgk fd og dsoy iSlk dekus dh n`f’V ls gS mls jksdk tkuk pkfg,A tgk¡ rd gekjs yksx xhrksa esa v”yhyrk gS mlds lanHkZ dks le>k tk,A mUgksaus dgk fd Hkkstiqjh n”kZu vkSj izn”kZu nksuksa dh Hkk’kk gSA Hkkstiqjh i<+uk ljy gks blds fy, gesa iz;kl djuk gksxkA

laxks’Bh esa oDrk ds :i esa MkW0 lquhy frokjh us dgk fd ftl Hkk’kk dh uhao vPNh gksrh gS ogh Hkk’kk vkxs c<+ ldrh gSA Hkkstiqjh dh uhao vPNh gS] bl ij l”kDr fuekZ.k fd;k tk ldrk gSA tc Hkk’kk l”kDr gksxh rks mldk O;kdj.k Hkh rS;kj fd;k tk ldrk gSA mUgksaus dgk fd Hkkstiqjh dks laokjus ds fy, ,d tquwu dh t:jr gSA gekjh lksp ds dkj.k gh Hkkstiqjh dh fLFkfr detksj gSA ml fLFkfr ls ckgj fudyuk gksxkA ge lHkh dks fopkj&foe”kZ djuk gksxk fd fdl izdkj Hkkstiqjh dks vkxs c<+k;k tk,A

MkW0 foeysUnq rhFkZadj us dgk fd vke rkSj ij dfork,a fy[kuk ljy gksrk gSA blfy, Hkkjr dh vU; lHkh Hkk’kkvksa esa igys dfork,a fy[kh xbZaA ijUrq Hkkstiqjh gh ,d ,slh Hkk’kk gS] ftldh “kq:vkr gh x| ls gqbZA i| jpus dh “kq:vkr ckn esa gqbZA mUgksaus dgk fd Hkkstiqjh esa izse vkSj Hkkouk dh lcls vf/kd laHkkouk gS ,slk ns[kk tk ldrk gSA mldks ns[kuk dk n`f’Vdks.k “khy&v”yhy gks ldrk gSA

fnYyh ljdkj ds Hkk’kk lfpo Jh ,u-ds-“kekZ us dgk fd lkfgR;dkj vkSj i=dkj lcls ltx izgjh gksrs gSaA mUgksaus dgk Hkk’kk ds fodkl esa mi&Hkk’kk egRoiw.kZ Hkwfedk gksrh gSA mUgksaus dgk fd Hkk’kk u gksrh rks ge v/kwjs gksrsA

12 flrEcj] 2016 eSfFkyh laxk’Bh % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *egkuxj esa eSfFkyh Hkk’kk vkSj laLd`fr* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa vkSj f”k{kkfon~ MkW- Kkurks’k >k dh v/;{krk esa vkRekjke lukru /keZ dkWyst] /kkSyk dqvk¡] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA oDrk ds :Ik esa izks- nso”kadj uohu ,oa Jh xkSjhukFk mifLFkr FksA lapkyu vdkneh ds lfpo MkW0 gfjlqeu fc’V ,oa vdkneh ds lnL; Jh Jh/kje us la;qDr :i ls fd;kA +

bl volj ij vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; flag us dgk fd eSfFkyh dsoy ,d Hkk’kk dk uke ugha gSA ;g fcgkj ls usiky rd QSyh ifo= fefFkyk Hkwfe dh iwjh ijaijk dk “kkfCnd fu:i.k gSA ;g ijaijk ,d le`) laLd`fr vkSj lkfgR; dh ijaijk gS tks vc gekjs egkuxjh; thou dh fcYdqy ubZ pqukSfr;ksa ls tw> jgh gSA bl pqukSrh dks ysdj gekjh  n`f’V lkQ gksuh pkfg,A dbZ txg yksx viuh ekr`Hkk’kk ds fodkl dks ysdj fgUnh ds c<+rs izHkko ij fpark trkrs gSaA esjk n`<+ er ;g gS fd viuh ekr`Hkk’kk ds izfr Hkjiwj J)k vkSj lEeku ds lkFk gh gesa ;g Hkh ekuuk iM+sxk fd fgUnh iwjs ns”k esa gjsd rcds ds yksxksa ls lEidZ djus dk lcls ljy vkSj l{ke ek/;e gSA blh rjg vaxzsth dk fojks/k djrs le; Hkh ;g ;kn j[kuk pkfg, fd iwjh nqfu;k esa lEidZ ds fy, vaxzsth t:jh gSA ns”k esa fganh vkSj nqfu;k esa vaxzsth dh enn ls ge Kku&foKku ds lkFk jkstxkj esa viuh Hkkxhnkjh c<+k ldrs gSaA eSfFkyh dh pqukSfr;k¡ njvly ogh gSa tks ckdh {ks=h; Hkk’kkvksa ls ysdj vc fganh vkSj mnwZ dh pkS[kV ij [kM+h gSA blls tw>us ds fy, t:jh gS fd cPpksa vkSj ;qok oxZ dks /;ku esa j[krs gq, eSfFkyh esa jpukdeZ vkSj rsth ls gks] bldh lkaLd`frd fojklr ls tksM+us okyh xfrfof/k;k¡ c<+kbZ tk,aA

laxks’Bh dh v/;{krk djrs gq, MkW- Kkurks’k >k us dgk fd Hkk’kk laLd`fr dh okgd gksrh gSA gesa vius ?kjksa esa vius cPpksa ds chp ekr`Hkk’kk esa cksyuk pkfg,] mls O;ogkj esa ykuk pkfg,A eSfFkyh Hkk’kk esa tks yksd lkfgR; gS] yksd dyk] yksd ukV;] yksd u`R; vkSj jhfr fjokt gSaa mldk fujUrj ifjektZu gksrk tk jgk gSA mls gesa viukuk pkfg,A mUgksaus vkxs dgk fd egkuxjksa esa viuh ekr`Hkk’kk ds izpkj&izlkj ds fy, cPpksa dh fofHkUu izfr;ksfxrk,a vk;ksftr dh tk,a] blls cPpksa esa laLdkj vius vki izokfgr gks tk,axsA

laxks’Bh esa oDrk ds :i esa Jh xkSjhukFk us dgk fd ekr`Hkk’kk izse dh Hkk’kk gksrh gSA mUgksaus dgk fd “kgjksa eas ekr`Hkk’kk ls nwj gksus dk ,d cM+k dkj.k gS la;qDr ifjokjksa dk fo?kVuA vc ifjokjksa esa cPps vkSj cw<+s ,d lkFk ugha jg ikrsA ftldk dkj.k ubZ ih<+h viuh ekr`Hkk’kk vkSj laLd`fr ls ugha tqM+ ikrhA

izks- nso”kadj uohu us dgk fd yksd Hkk’kk ds lanHkZ esa v”kq)rk gh “kq)rk gksrh gSA ekr`Hkk’kk dk vFkZ gh gksrk gS fd ftls ge v”kq) cksyrs gSaA mUgksaus bl ckr ij Hkh tksj fn;k fd yksd Hkk’kkvksa dks cpkus ds fy, gesa ekr`Hkk’kk dk ys[ku vkSj lao/kZu fd;k tkuk pkfg,A

Jh Jh/kje us dgk fd rjQ tgk¡ Xykscykbus”ku ds dkj.k eSfFkyh vkSj nwljh Hkk’kkvksa ij ladV vk;k gS ogha bu Hkk’kkvksa dks mldk Qk;nk Hkh feyk gSA t:jr ;g gS fd mifuosf”kd ekufldrk ls eqDr gksdj viuh Hkk’kk vkSj laLd`fr ls tqM+us dkiz;kl fd;k tk,aA

fnYyh ljdkj ds Hkk’kk lfpo Jh ,u-ds-“kekZ us dgk fd vdkneh mik/;{k egksn; ds usr`Ro esa Hkk’kk ds fodkl ds fy, vPNk dke dj jgh gSA mUgksaus dgk fd Hkk’kk u gksrh rks ge v/kwjs gksrsA Hkk’kk vkSj laLd`fr ekuo tkfr ds fy, egRoiw.kZ gSaA gekjs laLdkj etcwr gksus pkfg, rkfd laLd`fr dk fodkl fujUrj gksrk jgsA

16 vDVwcj] 2016 Hkkstiqjh laxk’Bh % eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk *pEikju vkSj egkRek* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa vkSj f”k{kkfon~ izks- izeksn dqekj dh v/;{krk esa vkRekjke lukru /keZ dkWyst] /kkSyk dqvk¡] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA oDrk ds :Ik esa MkW- gsear dqekj fgeka”kq] MkW- vkyksd jatu ik.Ms;] MkW-lquhy dqekj frokjh mifLFkr FksA lapkyu vdkneh ds lfpo MkW0 gfjlqeu fc’V ,oa vdkneh ds lnL; MkW- Vh-,u-vks>k us la;qDr :i ls fd;kA +

19 vDVwcj] 2016 eSfFkyh laxk’Bh % vdkneh fnYyh }kjk *xka/kh vk fefFkyk* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu f”k{kkfon~ MkW- Kkurks’k dqekj >k dh v/;{krk esa vkRekjke lukru /keZ dkWyst] /kkSyk dqvk¡] ubZ fnYyh esa fd;k x;kA oDrk ds :Ik esa lqifjfpr i=dkj Jh vjfoUn eksgu ,oa MkW0 bUnzeksgu dqekj >k mifLFkr FksA lapkyu vdkneh ds lfpo MkW0 gfjlqeu fc’V ,oa MkW- Jh/kje us la;qDr :i ls fd;kA

laxks’Bh dh v/;{krk djrs gq, MkW- Kkurks’k dqekj >k us dgk fd 1917 esa fefFkykapy ls xka/kh th us tks vkUnksyu pyk;k mlh ls 30 lky ckn 1947 esas Lora=rk izkIr gqbZA xka/kh th us [kknh ls] LoPNrk ls tks lans”k Hkkjr vkSj fo”o dks fn;k og okLro esa egRoiw.kZ gSA mUgksaus dgk fd Qk.kh”oj ukFk js.kw ds eSyk vk¡py miU;kl ij xka/kh n”kZu dk izHkko ns[kk tk ldrk gSA

laxks’Bh esa oDrk ds :i esa Jh vjfoUn eksgu us dgk fd xka/kh Nqvk Nwr ds f[kykQ Fks blfy, tc fefFkykapy esa vdky iM+k rks mUgksaus mls Nqvk Nwr ls tksM+ fn;k vkSj tkfr O;oLFkk ij yxkrkj izgkj djrs jgsA xka/kh th us dbZ cM+s usrkvksa dks xkaoksa ls tksM+kA bUgha dkj.kksa ls xka/kh th }kjk le;&le; ij pyk, x, vkUnksyu fcgkj esa lcls vf/kd izHkko”kkyh jgs gSaA

MkW0 bUnzeksgu dqekj >k us dgk fd vke rkSj ij ,slk ekuk tkrk gS fd xka/kh vkSj ekDlZokn esa vUrj gSA ijUrq xka/khokn vkSj ekDlZokn dh vUrj vkRek esa dksbZ vUrj ugha gSA xka/kh n”kZu vkSj fefFkykapy esa cgqr xgjs laca/k gSA mUgksaus crk;k fd fdl izdkj xka/kh lk/kkj.k ls vlk/kkj.k gq,A muds vlk/kkj.k gksus dk ewyea= Fkk & R;kx] izse] v/;kRe KkuA vkt tks fefFkyk esa lejrk gS mlesa xka/kh th dk egRoiw.kZ ;ksxnku jgk gSA 

laxks’Bh dk lapkyu djrs gq, MkW0 Jh/kje us dgk fd tgk¡ fgUnh lkfgR; esa Js’B lkfgR; dh jpuk,a gqbZ gSa ogha eSfFkyh Hkk’kk esa Hkh Js’B jpukvksa@d`fr;ksa dk fuekZ.k gqvk gSA mUgksaus crk;k fd ukxktqZu us fgUnh ds lkFk&lkFk eSfFkyh Hkk’kk esa Hkh vusd Js’B jpuk,a fy[kdj eSfFkyh Hkk’kk dks le`) djus esa egRoiw.kZ Hkwfedk fuHkkbZ gSA

vdkneh ds lfpo MkW0 gfjlqeu fc’V us dgk fd pEikju vkSj fefFkykapy ds xgjs laca/k jgs gSaA xka/kh vkSj fefFkykapy ds vUrjlaca/kksa dh iM+rky djus dh t:jr gSA mUgksaus vkeaf=r lHkh vfrfFk;ksa ,oa Jksrkvksa dk bl laxks’Bh esa i/kkjus ij /kU;okn Kkfir fd;kA 

6 uoEcj] 2016     NB iwtk ds volj ij dk;ZØe % vdkneh us NB egkioZ ds ekSds ij igyh ckj fnYyh esa fofHkUu 27 txgksa ij lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu o izksRlkgu fd;k gSA bu txgksa ij NB ds volj ij lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu xSj ljdkjh vkSj jgoklh laxBuksa ds tfj, fd;k x;k gSA

bu dk;Zdzeksa ds tfj, vdkneh us iz;kl fd;k fd bykgkckn ls ysdj iwjs iwohZ mRrj izns”k] fcgkj] >kj[k.M] NRrhlx<+ vkSj caxky ds ekynk ohjHkwfe] lksukiqj tSls lhek ls yxs bykdksa esa csgn J)k ls lfn;ksa ls xk, tk jgs yksd xhrksa dks muds ewy Lo:i esa gh izLrqr fd;k tk,aA ftls eSfFkyh vkSj Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d@xkf;dkvksa us NB lacaf/kr “kkL=h; vkSj yksd ekU;rkvksa dks u`R; vkSj xk;u ds tfj, vius ijEijkxr Lo:i esa yksxksa rd igq¡pk;k x;kA

vdkneh ds lg;ksx ls vk;ksftr vusd dk;Zdzeksa esa fnYyh ljdkj ds dyk] laLd`fr ,oa Hkk’kk ea=h Jh dfiy feJk ,oa vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us Lo;a mifLFkr gksdj dk;Zdze dk vkuUn fy;kA

18 fnlEcj] 2016 fHk[kkjh Bkdqj t;arh % vdkneh }kjk Hkkstiqjh ds lqizfl) ukVddkj fHk[kkjh Bkdqj dh t;arh ds volj ij *Hkkstiqjh yksd vkSj lkfgR; esa fHk[kkjh Bkdqj* fo’k; ij laxks’Bh dk vk;kstu vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; vkSj lqizfl) lkfgR;dkj MkW- xksis”oj flag* dh v/;{krk esa fnYyh fo”ofo|ky; esa fd;k x;kA oDrk ds :Ik esa MkW- pUnznso ;kno] MkW-lquhy frokjh] Jh jatu dqekj f=ikBh] Jh mes”k prqosZnh ,oa MkW- eqUuk ik.Ms; mifLFkr FksA lapkyu vdkneh ds lnL; MkW- Vh-,u-vks>k us fd;kA vdkneh dh vksj ls /kU;okn Kkiu lfpo MkW- thr jke HkV~V us fd;kA 

bl volj ij vdkneh ds mik/;{k Jh dqekj latkW; flag us dgk fd fHk[kkjh Bkdqj dks mudh tkfr&is”ks ds gokys ls n;k vkSj lgkuqHkwfr dk ik= cukuk drbZ mfpr ugha gSA lkekftd lq/kkj ds bl iz[kj ;ks)k us Nkrh Bksd dj viuh tkfr] is”kk vkSj  is”ks ds  mn~ns”; dk ckj&ckj ,yku fd;k Fkk &

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laxks’Bh esa oDrk ds :i esa MkW- pUnznso ;kno us dgk fd Hkkstiqjh Hkk’kk dks vUrjkZ’Vªh; Lrj ij igpku fnykus esa fHk[kkjh Bkdqj dk cgqr cM+k ;ksxnku jgk gSA lekt vkSj laLd`fr ds mRFkku esa mudh Hkwfedk dHkh Hkqyk;k ugha tk ldrkA

MkW0 lquhy frokjh us dgk fd fHk[kkjh Bkdqj us yksd lkfgR; dks viuh jpukvksa o ukVdksa ds ek/;e ls cgqr gh lqfu;ksftr <ax ls izLrqr fd;kA mUgksaus viuh jpukvksa esa ml le; dh Toyar leL;kvksa dks cgqr dkjxj <ax ls mtkxj fd;k gSA 

Jh mes”k prqosZnh us dgk fd 1922 ls 1960 rd ds dky dks ge fHk[kkjh Bkdqj ds dkj.k Hkkstiqjh dk Lof.kZe dky dg ldrs gSaA mUgksaus dgk fd fHk[kkjh Bkdqj us tgk¡ viuh jpukvksa ds ek/;e ls lekt lq/kkj esa egRoiw.kZ Hkwfedk fuHkkbZ ogha Lora=rk vkUnksyu esa Hkh mUgksaus vizR;{k :i ls izHkko”kkyh ;ksxnku fn;kA

MkW- jatu dqekj f=ikBh us dgk fd fHk[kkjh Bkdqj us /kkfeZd ijEijk ls yksd ijEijk dk fuekZ.k dj lekt esa ubZ psruk dk lapkj fd;kA fHk[kkjh Bkdqj us viuh jpukvksa esa vn~Hkwr m)j.k izLrqr dj Hkkstiqjh Hkk’kk dks ,d u;h fn”kk nhA mUgksaus dgk fd fHk[kkjh Bkdqj dh jpukvksa dk laLd`r esa Hkh vuqokn gksuk pkfg,A

MkW- eqUuk ik.Ms; us dgk fd jkgqy lkaLd`R;ku us fHk[kkjh Bkdqj dh jpukvksa ds vk/kkj ij gh mUgsa vux<+ ghjk ekuk gSA mUgksaus gh lcls igys dks[k ij efgykvksa ds vf/kdkj dh ckr dgh FkhA fHk[kkjh Bkdqj us ukjh laokn ds ek/;e ls cgqr gh lkFkZd O;aX; fd, gSaA

1 tuojh] 2016 lkaLd`frd dk;Zdze % vdkneh }kjk uoo’kZ ds volj ij iwokZapyokfl;ksa ds fy, xhr&x+t+y dk lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag ds lkfUu/; esa egkjktk vxzlsu dkWyst] olqU/kjk ,UDyso] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh vfousUnz Bkdqj ,oa Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh izse lkxj us viuh izLrqfr ls lHkh dks Hkko foHkksj dj fn;kA

 

7 tuojh] 2017 lkaLd`frd dk;Zdze % vdkneh }kjk lkaLd`frd dk;Zdze dk vk;kstu flfoy ykbu] fnYyh esa fd;k x;kA ftlesa eSfFkyh ds lqizfl) xk;d Jh fodkl >k ,oa Hkkstiqjh ds lqizfl) xk;d Jh xtk/kj Bkdqj rFkk fnYyh okyk cS.M ds dykdkjksa us lkaLd`frd dk;Zdze izLrqr fd;kA

 

8 tuojh] 2017 x.kra= fnol dfo lEesyu % x.kra= fnol ds miy{k esa fnYyh ds I;kjsyky Hkou esa eSfFkyh&Hkkstiqjh vdkneh] fnYyh }kjk vk;ksftr *jk’Vªh; dfo lEesyu* dh v/;{krk djrs gq, ofj’B i=dkj Jh jke cgknqj jk; us dgk fd dfo lekt esa le;&le; ij iSnk gksus okyh leL;kvksa dk fp=.k cgqr gh ekfeZd vkSj laonsu”khyrk ls djrs gq, lekt dks ,d ubZ fn”kk iznku djus dk dke djrs jgs gSaA Lora=rk vkUnksyu ds nkSjku Hkh dfo;ksa us viuh jpukvksa ds ek/;e ls Hkkjrh; tuekul dks vaxzsth “kklu dh dwzjrk ds fo:) ,dtqV fd;kA

bl volj ij vdkneh ds mik/;{k] Jh dqekj latkW; flag us fd x.kra= fnol dk mRlo vke rkSj ij dfo lEesyu ds :i esa eukus dh ijEijk dk ,d fo”ks’k dkj.k gSA ge bl egku x.kra= ds lEekfur x.k gksus ds vkRe lEeku] vf/kdkj vkSj nkf;Ro ds lkFk&lkFk jktuhfrd&lkekftd O;oLFkk dh folaxfr;ksa ls mits ih<+k vkSj jks’k dks “kCn ugha ns ikrsA dfo lekt dh bu Hkkoukvksa dks “kCn nsdj lRrk vkSj lekt ds chp lsrq dk dke djrk gSA

bl volj ij eSfFkyh ds lqizfl) dfo loZJh xaxs”k xqatu] ufUnuh ikBd*] fuosfnrk >k] jeu dqekj] lnz&,&vkye xkSgj rFkk Hkkstiqjh ds lqizfl) dfo xksj[k izlkn *eLrkuk*] nsodkar ik.Ms;] uw:y c”kj mLekuh] lqHknzk ohjsu us viuh jk’Vªh; Hkkouk ls vksr&izksr jpukvksa ls eu eksg fy;kA Hkkstiqjh ds ;qok dfo Jh eukst Hkkoqd us eap lapkyu fd;kA bl volj ij fnYyh ljdkj ds Hkk’kk lfpo] Jh ,u-ds-“kekZ mifLFkr FksA jk’Vªh; xk;u vkSj fo|kifr dh g`n;Li”khZ HkSjoh oUnuk ds lkFk lekjksg dh xfjeke; “kq:vkr gqbZA vdkneh ds lfpo MkW0 gfjlqeu fc’V us lHkh vfrfFk;ksa ,oa dfo;ksa ds lEesyu esa i/kkjus ij vkHkkj izdV fd;kA


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Last Updated : 14 Nov,2019